Valentine Day Special- Every day 'True Love Day'

हमारा भारत देश विभिन्न संस्कृति और सभ्यताओं का देश है। भारत की अपनी स्वयं की संस्कृति तो महान है, इसके साथ ही पश्चिमी सभ्यता को भी भारत अपने में संजोय हुए है। यही कारण है कि काफी समय से पश्चिमी सभ्यता में प्रेम का प्रतीक माना जाने वाला 'वेलेनटाइन डे' भारत में भी मनाया जाता है।

हम भारतीय जब भी मंदिर, मस्जिद, गुरुदवारा या चर्च आदि किसी भी धार्मिक स्थल के सामने से गुजरते हैं, तो हमारा शीश श्रद्धापूर्वक अपने आप ही झुक जाता है। कोई संत हो या फकीर हम उन्हें आदर सम्मान की दृष्टि से देखते हैं। ऐसा इसलिए भी है, क्योंकि हमारे पूर्वजों ने हमें दूसरों का सम्मान आदर करना सिखाया है। यही कारण है कि हम दूसरों की संस्कृति को भी बहुत जल्द आत्मसात कर लेते हैं। आखिर यह हमारे स्वभाव में है। हमारी सोच हमेशा सकारात्मक रही है। इसलिए हम भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के सारे देशों की रीति रिवाजों में उनकी संस्कृति का सम्मान करते हैं नहीं मानते हैं।

वेलेंटाइन डे कब मनाते है-

प्रत्येक वर्ष फरवरी माह की 14 तारीख को वेलेंटाइन डे के रुप में मनाया जाता है। जिस तरह हम क्रिसमस डे, गुड-फ्राइडे मनाते हैं, जो कि विदेशी त्यौहार है, ठीक उसी तरह से वैलेंटाइन दिवस मनाने में भी कोई बुराई नहीं है। लेकिन आज के कथित व ओछी सोच वाले युवाओं ने इसे विकृत बना दिया है और इसलिए यही कारण है की ज्यादातर भारतीय लोग इसका विरोध भी करते देखे जाते हैं। कहने का तात्पर्य त्यौहार या सांस्कृति कोई बुरी नहीं होती, ....बस इसको मनाने के तरीके में जो असभ्यता व अशालीनता आ गई है, इसलिए लोगों के मन में इस त्यौहार को लेकर घृणा देखी जाती है।

वेलेंटाइन डे को किसके साथ मनाना चाहिए-

इस दिन को प्यार के दिवस के रुप में जाना जाता है। लेकिन कुछ कुत्सिक मानसिकता के लोगों ने इस दिन के महत्व को भूलाकर, इस दिन को फुहड़ता का प्रतीक बना दिया है। जबकी यह प्रेम माता-पिता का अपने बच्चे से, बच्चे का अपने माता-पिता से, बुजुर्गों का अपने परिवार से, शिष्य का अपने गुरुजनों से, कलाकार का अपनी कला से, विद्यार्थी का अपनी शिक्षा से, प्रकृति प्रेमी का प्रकृति व वातावरण से.... यानी कहने का भाव यह एक तरह से भावनात्मक प्रेम के रूप में मनाया जाने वाला दिवस है। जिसे हम किसी के साथ भी मना सकते है।

त्यौहार मनाने का सही तरीका-

अगर आप वास्तव में त्यौहार मनाने का सही तरीका सीखना चाहते है, तो डेरा सच्चा सौदा, सिरसा का अनुसरण अवश्य करें। यहां पर हर त्यौहार को भावनात्मक तरीके से मनाया जाता है। इसके साथ ही हर त्यौहार को उसके असली महत्व से जोड़कर मनाया जाता है। आपको बता दे, डेरा सच्चा के प्रमुख संत डॉ गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने 'वेलेंटाइन डे' को 'ट्रयू लव डे' का नाम दिया है। क्योंकि यह दिन वास्तव में सच्चे प्रेम का दिन है। इस दिन यहां के श्रद्धालु जिनमें बुजुर्ग, युवा और बच्चे आदि सभी वर्गों के लोग शामिल होते हैं तथा यहां के स्कूल व कॉलेज के विद्यार्थी अपने सतगुरु, मुर्शिद पापा कोच को बड़े-बड़े पोस्टरों पर अपने प्रेम के संदेश को लिखकर शुभकामनाएं भेंट करते है। कुछ अनुयायी इस दिन अपने गुरु के सच्चे प्रेम में निर्जल व्रत भी रखते है, कुछ अच्छे नेक कार्य करने का प्रण लेते है। वहीं पूज्य गुरु जी अपने प्यारे बच्चों को पावन आशीर्वाद देकर 'ट्रयू लव डे' की बधाई देते हैं और इस दिन को मालिक के सच्चे प्रेम के रूप में मनाने की प्रेरणा देते हैं।

प्यार का सही अर्थ-

अगर हमारे पवित्र धर्मों में धार्मिक दृष्टि से देखा जाए तो हमारी आत्मा, उस परम पिता परमात्मा की ही अंश है। हमारे शरीर में बसी हुई आत्मा जब अपने सतगुरु-मालिक के साथ अपने निःस्वार्थ प्रेम को दर्शाती है, तब वह प्रेम अव्वल दर्जे का मंजूर किया जाता है। संत महापुरुष हमेशा से हर किसी के मालिक के प्रति होने वाले प्रेम को ही सर्वोच्च मानते आए हैं। तभी तो हमारे संत महापुरुष इतनी महान हुए हैं कि आज भी हम उनका नाम श्रद्धा से लेते है व उन्हें स्मरण स्मरण करते हैं।

निष्कर्ष-

संत महात्मा हमें हमेशा सच्चे प्रेम का पाठ पढ़ाते हैं। इस त्यौहार की यही वास्तविकता है कि इसे आत्मा व परमात्मा के प्रेम के साथ जोड़कर मनाया जाना चाहिए यही इस दिन को मनाने का सही तरीका है।

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