मानसिक रूप से विक्षिप्त मंदबुद्धियों की सार-संभाल की ऐतिहासिक मिसाल

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इंसानों से भरी इस दुनिया में आज हर कोई अपने मतलब से मतलब रखता है। हर इंसान खुद के अलावा किसी के बारे में सोचने के लिए समय नहीं है। यदि वह किसी से बात भी करे तो इसके पीछे उसका कोई न कोई मकसद है। तो ऐसे हालात में जब किसी का कोई अपना उस से बिछड़ जाए तो वो कैसे उम्मीद कर सकता है कि वह उन्हें दोबारा मिलेगा।

जी हां, हम यहां बात कर रहे है हर शहर, हर कस्बे में फुटपाथ व गलियों में आवारा घूमने वाले मानसिक रोगियों की। ऐसे लोग जिन्हें आमतौर पर समाज एक पागल की भूमिका दे देता है। क्या कभी किसी ने सोचा है कि ऐसे पागल व कम दिमाग कहे जाने वाले लोगों के साथ क्या बितती है जब वे इस हालत के शिकार होते हैं।

हमने अक्सर देखा है कि गलियों के नुक्कड़ या फुटपाथ पर शराब में धुत लोग गिरे हुए मिलते हैं। मगर ऐसी जगहों पर कुछ ऐसे लोग भी मौजूद होते हैं जो अपने जीवन की कठिन परिस्थितियों के शिकार होते हैं। इनमें से कुछ अपनी खराब मानसिक हालत के चलते अपने घरवालों से बिछड़ जाते हैं तो कुछ को उनके घरवाले बोझ समझकर बाहर फेंक देते हैं भटकने के लिए।

मुश्किल है ऐसा जीवन व्यतीत करना-

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ऐसे लोग अपनी अस्थिर मानसिक पीड़ा के साथ-साथ अनेकों मुश्किल हालातों का सामना करते हैं। ऐसे लोगों को शारीरिक चोट व बीमारियों से भी लड़ना पड़ता है। ऐसे इंसानों की सार सम्भाल के लिए जब कोई नहीं होता तो ये लोग अपनी शारीरिक हालत खराब कर लेते हैं। इनके बाल, नाखून बड़े हो जाते हैं और कपड़े भी फटेहाल हो जाते हैं क्योंकि इनकी खराब मनोस्थिति के कारण इन्हें खुद की कोई सुध नहीं रहती। और अंत में ऐसे लोगों को दुनिया पागल करार दे देती है।

हर व्यक्ति की अपनी कहानी है-

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दुनिया में ऐसे बहुत से लोग हैं जो जन्म से ही मानसिक रोगी होते हैं। ऐसे में कुछ नेक दिल परिवार जहां अपने बच्चे की सम्भाल अच्छे से करते हैं वहीं कुछ लोग मजबूरीवश या घृणा से ऐसे मानसिक रोगियों को खुद से अलग कर मरने के लिए छोड़ देते हैं।

किन्तु हर व्यक्ति शुरू से ही पागल नहीं होता। बहुत से लोग ऐसे भी होते हैं जो अपने जीवन की किसी भयानक परिस्थिति या किसी दिमागी चोट की वजह से ऐसी मनोस्थिति का शिकार बन जाते हैं। ऐसे लोग कई बार इस बीमारी के चलते गुमशुदा हो जाते हैं और अपने परिवार से बिछड़ जाते हैं और दुनिया भी इन्हें पागल समझ कर इनसे नज़रें फेर लेती है।

परिजनों का हो जाता है बुरा हाल-

ऐसे मानसिक रोगियों के परिवार वालों पर क्या गुजरती है इसका अंदाज़ा लगाना बेहद मुश्किल है। किसी का बेटा-बेटी, भाई-बहन, पिता-माता उनसे बिछड़ जाए तो उनका जीना कितना कठिन हो जाता है। हर पल इसी चिंता में काटना की उनका प्रिय जिंदा है अथवा मर गया और वो किस हालत में होगा यह अपने आप में एक बहुत बड़ा दुख है।

जीवन जीने की आशा- True Life मुहिम

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जब दुनिया में ऐसे लाखों लोग भटक रहे थे, जिनका कोई भी सहारा बनना नहीं चाहता था। तब डेरा प्रमुख बाबा राम रहीम जी द्वारा शुरू की गयी एक अनोखी मुहिम- true life। इस मुहिम के तहत जगह-जगह घूमने वाले मंदबुद्धि लोगों की देख-रेख व उनके उचित इलाज की जिम्मेदारी डेरा अनुयायियों द्वारा ली गयी।

हर राज्य में डेरा सच्चा सौदा के श्रद्धालुओं ने टीम बनाकर ऐसे मानसिक रोगियों की देखभाल की व उनका सही उपचार किया। अब तक ऐसे हज़ारों मानसिक रोगियों को डेरा अनुयायियों ने सही चिकित्सा व देखभाल उपलब्ध करवाकर स्वस्थ किया है। यही नहीं अब तक अनेकों ऐसे लोग है जिनका मानसिक उपचार करवाने के बाद डेरा अनुयायिओं द्वारा उनके बिछड़े परिजनों को ढूंढकर उनसे मिलवाया गया।

बीकानेर से हुई थी शुरुआत -

मंदबुद्धियों की संभाल की शुरुआत उस समय हुई थी जब पूज्य गुरु संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सा नवंबर 2011 में, ‘हो पृथ्वी साफ, मिटे रोग अभिशाप’ के तहत सफाई अभियान के तीसरे चरण के लिए बीकानेर जा रहे थे। उस समय पूज्य गुरु जी की नजर एक ऐसे व्यक्ति पर पड़ी, जो बीच रास्ते गर्मी में भी कंबल ओढ़े हुए सड़क के किनारे पर पड़ा था। पूज्य गुरु जी ने उस व्यक्ति को देख गाड़ी रुकवाई तथा उनके पास गए। उसको देखने पर पता चला कि उसने कई दिन से कुछ भी खाया पिया नहीं था। पूज्य गुरु जी के आह्वान पर सेवादार उसे अपने साथ ले आए तथा उसका इलाज करवाया। उस व्यक्ति की मानसिक हालत भी काफी ठीक हो गई। वह बंगाल का रहने वाला था। बाद में उसके परिजनों का पता लगाकर उसको उनके हवाले कर दिया था। इस वाक्य के बाद पूज्य गुरुजी ने मानवता भलाई कार्यो की श्रृंखला में ‘सड़कों पर भटक रहे मंदबुद्धियों की सार संभाल व इलाज कराने और उनके परिजनों तक पहुंचाने के लिए नए इस पुनीत कार्य की शुरुआत कर दी। तब से लेकर आज तक साथ-संगत मंदबुद्धियों की सार-संभाल करती आ रही है। https://www.derasachasauda.org/true-life/

ज़माने ने दुत्कारा, ‘इन्सां’ बने सहारा-

जहां इस संसार में ऐसे बेसहारा मंदबुद्धि इन्सानों की तरफ कोई देख कर भी राज़ी नहीं होता, वहीं हरियाणा राज्य की सामाजिक संस्था डेरा सच्चा सौदा के करोड़ों अनुयायी अपने सतगुरु की पावन प्रेरणा पर चलते हुए ऐसे मानसिक रोगियों का सहारा बने। डेरा प्रमुख संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां द्वारा चलाई गई इस अनोखी मानवता भलाई की मुहिम के तहत डेरा अनुयायियों ने इन मंदबुद्धि लोगों की सार-सम्भाल करने का बीड़ा उठाया है। https://www.derasachasauda.org/meditation-get-rid-of-stress-anxiety/

अब तक हजारों विक्षिप्तों की सार-संभाल व इलाज करा उनके परिजनों से मिलवाया-

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डेरा सच्चा सौदा के सेवादार सड़कों पर मिलने वाले विक्षिप्तों कि अपनों से भी बढ़कर सार संभाल कर रहे हैं। साथ-संगत इन मंदबुद्धियों का इलाज करवाकर, तब तक उनकी देखभाल करते है। जब तक कि उनके परिजनों का पता नहीं मिल जाता। उन्हें खाना, दवाई समेत तमाम सुविधाएं मुहैया करवाई जाती है। परिजनों का पता मिल जाने पर व्यक्ति को उनके परिजनों के हवाले कर दिया जाता है। अब तक डेरा सच्चा सौदा द्वारा हजारों विक्षिप्त लोगों को उनके परिजनों से मिलवा चुके है। https://www.derasachasauda.org/true-life/

शत-शत नमन ऐसी प्रेरणा को-

ऐसे परिवार जिनके सालों से बिछुड़े बच्चे या माता-पिता उनसे मिले हों वे सभी डेरा श्रद्धालुओं व उनके पूज्य गुरुजी का लाख-लाख धन्यवाद करते हैं। उनका कहना है कि ऐसी प्रेरणा व प्रेरणा देने वाले गुरुजी को कोटि-कोटि प्रणाम जिन्होंने हमारे वर्षों से चल रहे दुख का अंत किया। यह परिवार डेरा सच्चा सौदा व गुरुजी के सदैव आभारी रहेंगे।

ऐसी उच्च प्रेरणा के प्रेरणास्रोत-

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मानवता भलाई के 134 चलाने वाले व डेरा सच्चा सौदा के करोड़ों अनुयायियों को इस प्रकार के अनोखे समाजहित के कार्य करने की प्रेरणा देने वाले कोई और नहीं बल्कि डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख सन्त डॉ गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां हैं। जी हां, पूज्य गुरुजी ने ही अपने करोड़ों भक्तों को इंसानियत के ऐसे सच्चे मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी है व अपने वचनों द्वारा हमेशा डेरा श्रद्धालुओं को मानवता के हित में कार्य करने के लिए निर्देश दिए हैं। गुरुजी की ऐसी पावन प्रेरणा को हम लाखों बार सलाम करते हैं।

Conclusion-

अपने लिए तो हर कोई सोचता ही है, किंतु ऐसे स्वार्थी संसार में किसी ऐसे इंसान के लिए सोचना जिनकी मानसिक हालत तक खराब हो व उनकी देखभाल तथा उपचार करना, यह अपने आप में एक मिसाल है। डेरा अनुयायियों के इस ज़ज्बे को देखते हुए हमें भी यह कोशिश करनी चाहिए कि ऐसे मंदबुद्धि लोगों की जहां तक हो सकें मदद करें। क्या पता आपकी वजह से किसी को उनका खोया हुआ परिजन ही मिल जाए यकिन मानिए आपको दुआएं मिलेंगी।

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