The Greatest Gift- Truly the gift of happiness to the childless couples

संतान — एक ऐसा शब्द जिस से हर पती-पत्नी का जीवन माता-पिता कहलाने के बाद सम्पूर्ण जीवन कहलाता है। आज के आधुनिक समय में भी जिस माता-पिता के जीवन में संतान का सुख नहीं होता, उन्हें समाज विभिन्न तरीकों से नीचा दिखाकर अपमानित करता है। इसका कहीं ना कहीं सबसे बड़ा दोषी हमारा पढा़- लिखा समाज होने के बावजूद भी महिलाओं को ही समझा जाता है। उन्हें विभिन्न तरह की बातें सुना-सुना कर कलंकित किया जाता है।

जिस माता-पिता के जीवन में संतान का सुख होता है, उन्हें एक खुशहाल परिवार कहा जाता है।

A child fills an entire home with lots of happiness-

बच्चे सिर्फ माता-पिता या परिवार की ही रौनक नहीं होते, बल्कि वे पूरे समाज को अपने साथ बांधे रखते हैं। उनकी नन्हीं-नन्हीं किलकारियों से घर का आंगन मानो, खुले आसमान में पक्षियों के समान चहचाहता हुआ नज़र आता है। हर माता-पिता के दिन भर की थकान अपने बच्चों को हँसता, खेलता देखकर ही मानों गायब हो जाती है। कहा जाता है कि बच्चों के जन्म के साथ-साथ माता-पिता के भी नये जीवन और जन्म की शुरुआत होती है। हर अभिभावक अपना बचपन बच्चों के साथ दोबारा जी लेते हैं।

Childlessness is a curse in our society-

आज जहाँ हमारा समाज आधुनिकता का चोला पहनकर आगे बढ रहा हैं। वहीं कुछ पुरानी विडम्बना आज भी समाज में प्रचलित हैं। क्योंकि हमारे समाज में शादी के कुछ वर्षों के बाद संतानहिनता एक कलंक माना जाता है। आमतौर पर हमारे समाज में यह माना जाता है कि लड़का-लड़की की एक निश्चित उम्र में शादी करना, बच्चे पैदा करना और वंश को आगे बढ़ाना सही है। यदि कुछ कारणवश एक युगल जोड़ी के पास कुछ समय तक संतान नहीं होती, तो हमारे समाज में उन पर बहुत दबाव डाला जाता है।

आमतौर पर यह देखने में आता है कि लोग संतान प्राप्ति के लिए प्रार्थना करने के लिए विभिन्न अंधविश्वासों और मूर्खतापूर्ण रीति-रिवाजों का पालन करते हैं ।कलाई आदि पर धागे बांधना, महिलाओं को कुछ स्थानीय ओझाओं के पास जाने का सुझाव दिया जाता है, जो मोर के पंख से उन्हें पीटते हैं। जिसे लोग झाडे़ का नाम देते है। हमारे समाज के लोग महिलाओं को उपवास करने के लिए मजबूर करते हैं। ऐसे तरह-तरह के अंधविश्वास फैलाएं जाते है। यदि कुछ वर्षों के बाद भी कोई परिणाम प्राप्त नहीं होता, तो कई लोगों को तलाक या पुनर्विवाह करने का सुझाव दिया जाता है। इस प्रकार हमारे समाज में संतानहीन होना एक अभिशाप माना जाता है।

वह संस्था जिसने निःसंतान दंपतियों के बारे मे सोचा-

पूरे विश्व में डेरा सच्चा सौदा एकमात्र ऐसी संस्था हैं, जो 134 मानवता भलाई के कार्य करने में हमेशा अग्रणी रही हैं। इस संस्था के प्रमुख पूज्य गुरु सतं डाॅ गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां जिन्होनें 134 मानवता भलाई के कार्य करने के कार्य करने की सीख अपने लाखो करोडों अनुयायियों को दी हैं। इन कार्यों में एक कार्य “The Greatest Gift” के नाम से शुरू किया गया, जिसके तहत जिस घर में या माता-पिता के जीवन में दो संतानों का सुख हो वह अपनी एक संतान अपनी इच्छा से ऐसे नि:संतान दम्पति को उपहार के रूप में गोद देते हैं। जिन्हें किसी कारणवश संतान की प्राप्ति न हुई हो।

संतान प्राप्ति का सपना देखने वाले अभिभावकों के लिए आशा की एक किरण-

एक निःसंतान दंपति के लिए संतान की प्राप्ति सबसे बड़ा उपहार होता है। हर माता-पिता का सपना होता है कि उनके पास एक संतान हो, लेकिन कुछ कारणवश ऐसा संभव नहीं हो पाता है। ऐसे अभिभावकों के बारे में सोचा डेरा सच्चा सौदा संस्था ने व इसके प्रमुख संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने, क्योंकि आज के समय में जहाँ कोई अपने बाल की एक खाल भी दूसरों को नहीं देना चाहता, वहीं दूसरी तरफ कुछ ऐसे भी लोग हैं जो अपने जिगर का टुकड़ा, अपनी जन्मी औलाद तक भी दान कर देते हैं। जी हां, यह सत्य है।

डेरा सच्चा सौदा एक ऐसा संगठन है, जिसके माध्यम से हजारों विवाहित निःसंतान दंपतियों को सबसे बड़ा अनमोल उपहार दिया गया है। पूज्य गुरु जी की पावन प्रेरणा से कुछ माता-पिता अपने बच्चे को उन लोगों को देना चाहते हैं, जो बच्चे होने का सपना देखते हैं। इसमें वह माता-पिता भी शामिल है, जो अपने बच्चे की परवरिश करने में सक्षम नहीं है और जिन्होंने एक बार उसका गर्भपात कराने का फैसला किया था। लेकिन पूज्य गुरु जी ऐसे माता-पिता से आग्रह करते हैं कि वह उसका गर्भपात ना करें, क्योंकि यह एक अपराध है। इसके बजाय बच्चें किसी ऐसे व्यक्ति को गोद दें, जो संतान प्राप्ति के लिए तरसते है।

Millions of people witness the adoption process-

आज के समय में हमारे भारत देश में बच्चे को गोद लेने के लिए सख्त कानूनों का पालन करना पड़ता है। बच्चे को adopt करने के लिए सबसे पहले कागजी कार्यवाई की आवश्यकता पड़ती है डेरा सचा सौदा संस्था में सभी कानूनी औपचारिकताएं बच्चे को गोद लेने लेने से पहले ही की जाती है। माता-पिता सत्संग में लाखों-करोड़ों लोगों के समक्ष अपने बच्चे को निःसंतान दंपतियों को दान करते हैं। बाद में पूज्य गुरु जी दोनों परिवारों को प्यार भरा आशीर्वाद देते हैं।

Truly the Greatest Gift Of Happiness-

‘The Greatest Gift’ इस मुहिम की शुरुआत डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख सतं डाॅ गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां द्वारा सितम्बर 2011 में की गई और अब तक डेरा सच्चा सौदा द्वारा 400 से अधिक बच्चे कानूनी कार्रवाई के द्वारा नि:संतान दम्पतियो को गोद दिए जा चुके हैं। खून के रिश्ते तो सभी निभाते हैं, लेकिन मानवता के रिश्ते को अपनाने वाले को ही सच्चा इंसान कहा जाता हैं। अपने गर्भ में जन्मी औलाद को एक मां कैसे दूसरी मां व परिवार को उनका घर रोशन करने के लिए सौंप देती है। यह तो कोई केवल उन माता-पिता से ही सीख सकता है। ऐसा सुनने में बहुत अच्छा लगता है, किंतु करना सहुत मुश्किल होता है। धन्य है! धन्य हैं!! ऐसा उपहार देने वाले माता-पिता और उनमें ऐसी नेक सोच भरने वाले पूज्य गुरु संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां।

Source of inspiration for millions-

आज के समय में अधिकतर लोग अपने जीवन में व्यस्त रहते हैं व जीवन में खुशियों को पाने के लिए दिन-रात संघर्ष करते हैं। किसी की मदद करने के लिए व नेक कार्यों में कदम बढ़ाने के लिए नेक शिक्षा की आवश्यकता होती है। ऐसी नेक शिक्षा के प्रेरणादायक डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां है, जो हमेशा लोगों को जरूरतमंद लोगों की मदद करने के लिए प्रेरित करते हैं। पूज्य गुरु जी की पावन प्रेरणा से ही आज सैकड़ों माता-पिता इस नेक कार्य के लिए आगे बढ़े हैं और अपने बच्चे, जिगर के टुकड़े को निःसंतान दंपतियों को दान कर रहे हैं।

Conclusion-

हम सभी को चाहिए की हम आपस में एक-दूसरे के साथ मिलकर रहें व एक-दूसरे की निःस्वार्थ भाव से मदद करे। इसके साथ ही प्रयास करे किसी के दुःख को कम करने व दूर करने की।

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