पाखण्डवाद को त्याग, करें प्रभु की सच्ची भक्ति

अंधविश्वास एक ऐसा दीमक है दुनिया के कोने कोने में फैला हुआ है। आज के इस आधुनिक दौर में भी लोग अंधविशवास में इतना ज्यादा खोए हुए है कि उन्हें सच-झूठ में कोई फर्क नजर नहीं आता। हमारे समाज का एक बहुत बड़ा वर्ग आज भी अंधविश्वासों से घिरा हुआ है। इनमें अशिक्षित और पढ़े-लिखे दोनों ही प्रकार के लोग शामिल हैं। ये लोग झाड़-फूंक, जादू-टोना और टोटकों से लेकर तरह-तरह के भ्रमों पर विश्वास करते हैं। यहां तक कि ऐसे लोग अंधविश्वास में पड़कर अपना सबकुछ दांव पर लगा देते हैं। ऐसे में हमें जरूरत है कि समाज से ऐसी बीमारी को जड़ से उखाड़ फेंकने की। लेकिन इस के लिए हमें इस बीमारी के बारे में अच्छे से पता होना चाहिए।

Superstitions और उनके पीछे की वास्तविकता

मन्नत मांगना , पेड़ पर धागा बांधना आदि :

हम में से बहुत लोग मंदिर में जाकर मन्नत मांगते होंगे कि मेरा ये काम हो जाए तो मैं मंदिर आ कर इतने पैसे चढ़ाऊंगा। कोई पेड़ पर धागा बांधता है कि मेरा बेटा हो जाए, मेरा काम धंधा चलने लग जाए मैं फिर आऊंगा इत्यादि।

असलियत- यह सब केवल अंधविश्वास है। क्योंकि भगवान किसी से पैसे का भूखा नहीं है। उस से यदि कुछ मांगना ही है तो धागा बांध कर नहीं अपितु भावना से दिल से मांगिए।

वास्तु शास्त्र में विश्वास करना :

बहुत से लोग वास्तुशास्त्र की विधि को बहुत ही महत्व देते हैं। उनका मानना है कि वास्तुशास्त्र के अनुसार यदि उनके घर या ऑफिस की स्थिति सही न हो तो उनका कोई भी काम नहीं बनता।

असलियत- ऐसा सोचना और मानना केवल एक भ्रम है। प्रकृति ने संसार की सब जगहों को सुंदर व सकारात्मक बनाया है। काम किसी भी वास्तु को मानने से नहीं अपितु मेहनत करने से सार्थक होता है।

गंडा-ताबीज :

किसी की बुरी नजर से बचने, भूत-प्रेत या मन के भय को दूर करने या किसी भी तरह के संकट से बचने के लिए कई लोगों द्वारा गंडे-ताबीज का उपयोग किया जाता है।

असलियत- ऐसा करना पूर्णतः अंधविश्वास को बढ़ावा देना है। यदि आप सच्चे हैं और नेक नियति से काम करते हैं तो आपको कोई नज़र या जादू-टोना नुकसान नहीं पहुंचा सकता।

राशि अनुसार अंगूठी पहनना:

दुनियाभर में अंगूठी पहनने का प्रचलन है। हालांकि ये एक fashion है। लेकिन ज्यादातर लोग राशि के अनुसार अंगूठी पहनते हैं। इन लोगों का विश्वास है कि इससे हमारे बुरे दिन मिट जाएंगे और अच्छे दिन शुरू हो जाएंगे। और तो और लोग अपने ग्रहों की दशा सही रखने के लिए भी अलग-अलग प्रकार की अंगूठियां पहनते हैं। किन्तु ऐसा करना केवल अंधविश्वास से अधिक कुछ नहीं है।

असलियत- यदि अंगूठी पहनने से ही हर कोई सफल हो जाता तो जो लोग हीरे, माणिक की खानों में काम करते हैं वो लोग मजदूरी कर के अपना पेट क्यों भरते। उनकी ग्रहदशा तो इन रत्नों के कारण अपने आप सही हो जाती।

आंख फड़कना:

लोगों में अक्सर यह भी भ्रम रहता है कि यदि दाईं तरफ की आंख फड़के तो अच्छा होगा और यदि बाईं तरफ की आंख फड़के तो बुरा होगा।

असलियत- आपको बता दें दोनों आंखे ही आपका हिस्सा है तो अच्छा यह बुरा कैसे हो गया? आंख फड़कना केवल हमारे शरीर का एक scientific reaction है और कुछ नहीं। और हमारे शरीर में केवल आंख ही नहीं और भी अंग फड़कते हैं। इसलिए इंसान को इन भ्रमो में नहीं पड़ना चाहिए। पूज्य गुरु जी लाखों लोगों को इसके लिए जागरूक किया।

काली बिल्ली का रास्ता काटना:

कई लोग कहते हैं कि यदि कहीं जाते वक्त काली बिल्ली रास्ता काट जाए तो थोड़ा रुक जाना चाहिए।

असलियत- यह एक कोरा अंधविश्वास है और इसमें उस बिचारे जानवर का क्या दोष? वह बेजुबान भी हम सबकी तरह ही प्रकृति की देन है इसलिए उसे जहां से रास्ता मिलेगा वहीं से जाएगा। किन्तु ऐसा तो नहीं कि कहीं आप उसका रास्ता काट रहे हों?? पूज्य गुरु जी ने करोड़ो लोगों के दिमाग से इस पांखड से बाहर निकाला और सच से जागरुक किया।

बाहर जाते वक्त किसी का छींकना-

एक और अंधविश्वास लोगों में देखने को मिलता है और वो यह है की यदि आपके बाहर जाते वक्त कोई छींक दे तो थोड़ी देर रुक कर जाना चाहिए।

असलियत- ऐसा मानना केवल एक भ्रम है। उदाहरण के लिए अगर आपके घर पर किसी इंसान को सर्दी-जुकाम हो तो!!! क्या आप बाहर ही नहीं निकलेंगे। इस धारणा के लिए पूज्य गुरु संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने लाखों लोगों को जागरूक किया और सच्चाई से अवगत कराया।

करोड़ो लोगों को पाखण्डवाद से बचाकर, सच्चाई से अवगत कराया-

हरियाणा राज्य के सिरसा जिले में स्थित डेरा सच्चा सौदा संस्था के प्रमुख संत डॉ गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सा ने अपने सत्संगो के माध्यम से करोड़ो लोगों को समझाया व उन्हें पाखंडवाद से बचाकर सच्चाई से अवगत कराया है। पूज्य गुरु जी अंधविश्वास भरी बातों का सिरे से खंडन करते हैं। यही नहीं पूज्य गुरु जी सत्संग में हमेशा लोगों को ऐसे भयानक पाखण्डवाद से होने वाली हानि के बारे में जागरूक करते रहते हैं।

गुरुजी ने अपने बहुत से वचनों द्वारा इन अंधविश्वास भरी बातों की सच्चाई भी लोगों को बताई है। जैसे कि ️काफी लोग राशि के अनुसार अंगूठी पहनने में विश्वास रखते हैं, जबकि पूज्य गुरु जी ने बताया कि जो आपको अंगूठी देता है कि आप यह पहनों तो अमीर हो जाओगे तो क्या वो खुद सारी उंगलियो में अंगूठी पहन कर रातों-रात अमीर नहीं हो सकता। तो क्यों लोगो को मिन्नते करता है अंगूठी ले लो …यह सब कई पांखडी लोगों ने कमाई का साधन बना रखा है। ऐसे लोगों से हमें बचना चाहिए।

तिथि या वार के अंधविश्वास की सच्चाई-

आजकल यह भी देखने में आया कि अक्सर लोग कह देते है इस दिन यह काम नही करना चाहिए यह दिन अच्छा नहीं होता। इस दिन वो नहीं करना। ये दिन शुभ है ये दिन अशुभ है। वीरवार को सिर नहीं धोना। शनिवार को नाखून नहीं काटने वगैरह वगैरह। पूज्य गुरुजी ने इस बारे में लोगों को जागरूक करते हुए बताया कि जैसे एक धर्म के लोग कहते हैं कि बुध काम शुद्ध, तो दूसरे धर्म के लोग कहते हैं कि बुध लगावे युद्ध। इस प्रकार तो सारे ही दिनों का क्रिया कर्म हो गया। जबकि ऐसा कुछ नहीं होता, सारे दिन ही अच्छे होते हैं। कोई भी शुभ काम करने से पहले भगवान का नाम ले ले सब अच्छा होगा। पूज्य गुरु संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि दिन कोई बुरा नहीं होता। भगवान ने केवल दिन-रात बनाए है, दिनो के नाम भगवान के बनाए इंसान ने रखे हैं।

पशु बलि है अपराध-

कई तरह के सम्प्रदायों में भगवान या रीतियों के नाम पर पशुओं की बलि चढ़ाई जाती है। यह सरासर गलत है व धर्म के नाम पर किया जाने वाला एक बहुत बड़ा अपराध है। पूज्य गुरुजी फरमाते है कि धर्मों में कहीं नहीं लिखा है कि देवी-देवता किसी जीव की बली लेते हैं। बल्कि वह तो समाज का भला करते हैं व लोगों के भले के लिए ईश्वर से दिन-रात प्रार्थना करते रहते हैं। सभी जीव-जन्तु उनकी सन्तान है तो भगवान अपनी ही सन्तान की बलि क्यों चढ़वायेगा? यह धर्म की आड़ में कुछ नीच मानसिकता वाले लोगों द्वारा घोर आपराधिक कार्य है जो कि माफी के लायक नहीं है। पूज्य गुरु जी ने लाखों लोगों को इस पाखंडवाद से आजाद करवाया।

अन्य अंधविश्वासों का निदान-

पूज्य गुरु संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि अगर बिल्ली रास्ता काट जाए तो बहुत से लोग वहम करते है। काम पे जाते-जाते वापिस आ जाते हैं। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं की जानवर भी इसी संसार का हिस्सा है। उनका अपना कोई घर स्थान नहीं होता है। ऐसे ही उनके लिए आने-जाने का अलग से कोई रास्ता नहीं बना है। पूज्य गुरु जी ने सत्संगो के माध्यम से करोड़ो लोगों को समझाया और साल से अवगत कराया।

भूत-प्रेत नहीं होते -

पूज्य गुरु संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने सत्संगो के माध्यम से लोगों को जागरूक किया की इस धरती पर भूत-प्रेत नहीं होते, उनके लिए अलग से रूहानी मंडलों पर जगह बनाई गई है। लेकिन आमतौर पर बहुत से लोगों की यह धारणा रहती है कि भूत-प्रेत होते हैं। वह किसी भी मानसिक तौर पर बीमार इंसान को बोल देते हैं की इसमें भूत-जिन्न है। वह यह भूल जाते हैं कि उस इंसान को दिमागी दौरा भी हो सकता है। बल्कि वह पाखंड में पड़ जाते हैं और किसी तांत्रिक के पास ले जाते हैं। फिर वह तात्रिंक लोगों से भूत निकालने के लिए ढेरो पैसै लेता है। उस भूत निकालने के बहाने उस इंसान के साथ मार-पीट करता है। पूज्य गुरुजी फरमाते है कि यदि भूतों को आना ही है तो अमीरों में आएं जो सुबह का नाश्ता किसी और देश में और रात का खाना किसी और देश में खाते है। जहाज़ पर सवारी करते हैं। ऐसा केवल गरीब और पिछड़े वर्ग में ही क्यों होता है? ऐसा इसलिए है क्योंकि इसका सीधा-सीधा कारण अशिक्षा व अज्ञानता है। क्योंकि अज्ञानता ही भूत है। यदि हमारे समाज में ये दोनों कारण जिंदा रहेंगे तो अन्धविश्वास हमारे समाज को ऐसे ही खोखला करता रहेगा।लेकिन पूज्य गुरु जी ने करोड़ो लोगों को इस पाखंडवाद से बाहर निकाला और ईश्वर की भक्ति का सच्चा रास्ता बताया।

यदि भाग्यशाली बनना है तो अपनाएं ये तरीके-

पूज्य गुरु जी के अनुसार एक इंसान की असली दौलत उसके अपने अंदर होती है। यदि मनुष्य बुद्धि और विवेक से काम ले तो उसे कामयाब होने के लिए किसी तंत्र-मंत्र की आवश्यकता नहीं पड़ती।

पूज्य गुरु संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने सबसे पहला तरीका बताया है कि यदि कोई व्यक्ति जीवन में सफल होना चाहता है। तो वह किसी भी shortcut को न अपनाएं। कई बार shortcut के चक्कर में इंसान अपनी ज़िंदगी को नुकसान पहुंचा बैठता है। इसलिए अपने लक्ष्य को पाने के लिए पूरी लगन से मेहनत करें। अपने aim पर ध्यान केंद्रित करें व उसे पाने के लिए पूरी तरह कोशिश में जुट जाएं और आखिर में सफलता आपके कदम जरूर चूमेगी।

पुज्य गुरुजी के अनुसार दूसरा सबसे खास तरीका है प्रभु, अल्लाह, वाहेगुरु, गॉड में विश्वास। यह सब नाम अलग हैं किंतु हमारा भगवान एक ही है। तो जरूरी है कि हम पाखंड़वाद को छोड़कर सच्चे और सही तरीके से मन से प्रभु की भक्ति करें व यह विश्वास रखें कि भगवान अपने बच्चों के साथ कभी गलत नहीं होने देते।

अब आती है बात की प्रभु की भक्ति करने का सही तरीका क्या है। तो इसके बारे में गुरुजी ने बताया है कि meditation एक रामबाण है, आपके सभी कार्यों को सिद्ध करने के लिए। यदि आप अपनी दिनचर्या में से समय निकाल कर रोज़ाना 1 घन्टा सुबह-शाम meditation का अभ्यास करते हैं और प्रभु का ध्यान करते हैं। तो दुनिया की कोई भी बुरी ताकत आपको नुकसान नहीं पहुंचा सकती व इसके साथ ही आप अपने लक्ष्य को आसानी से हासिल कर सकते हैं।

Conclusion-

यदि हम चाहते हैं कि हमारा देश व समाज ऐसे पाखण्डों और भ्रमों से मुक्त हो तो हमें अपने समाज के हर व्यक्ति में जागरूकता लानी होगी व उन्हें यह समझना होगा कि समाज के हर वर्ग के लिए शिक्षा कितनी जरूरी है। डेरा सच्चा सौदा के अनुयायियों की तरह ही हमें भी समाज के नागरिक होने का फ़र्ज़ अदा करना चाहिए व कभी अंधविश्वास में नहीं पड़ना चाहिए और न ही किसी को पड़ने देना चाहिए।

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