बच्चों को शिक्षित कर, एक मजबूत व स्वतंत्र राष्ट्र का निर्माण करे: विश्व बाल दिवस 2020

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किसी भी देश का भविष्य उस देश की युवा पीढ़ी पर निर्भर करता है। जिस प्रकार युवावस्था पूर्णतः बाल्यावस्ा के संस्कारों के विकास पर निर्भर करती है। अतः यह स्पष्ट तौर पर कहा जा सकता है कि बच्चे ही देश का भविष्य होते हैं। बच्चे ही युवा बनते हैं व सृष्टि के नियम के अनुसार में युवावस्था में जाकर बच्चे को जन्म देते हैं अर्थात् कुदरती तौर पर यह चक्र चलता रहता है। हम बच्चे को जिस प्रकार का वातावरण देंगे उसी के अनुरूप आगे बढ़कर बच्चे देश हित में कार्य कर पाएंगे। देश की व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए उस देश के बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य व उनको दिए गए संस्कारों का बहुत महत्व है। इसी को ध्यान में रखते हुए शुरू किया गया ‘Universal Children’s Day’

Universal Children’s Day -

विश्व भर में 20 नवंबर के दिन को विश्व बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है। United Nations हर साल 20 नवंबर को Universal Children’s Day यानी विश्व बाल दिवस के रूप में मनाता है। 20 नवंबर 1954 को विश्व बाल दिवस के रूप मनाने के बारे में सोचा गया व यह फैसला लिया गया कि इस दिन को बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य विकास व मूलभूत अधिकार प्रदान करने हेतु समर्पित किया जाएगा।

20 नवंबर का दिन इसलिए भी खास है क्योंकि 1959 में इसी दिन United Nations General Assembly ने Right of the Child को स्वीकार किया था। इसी प्रकार 20 नवंबर 1989 को UN General Assembly ने Conventions on the Rights of the Child को स्वीकार किया था।

Why to go with International Days -

International Days वह अवसर होते हैं जो आम जनता को National व International Crisis के बारे में सचेत करते हैं, ताकि उन मुद्दों पर विचार-विमर्श करके एक नई दिशा प्रदान की जा सके। Universal Children’s Day भी इसी प्रकार प्रत्येक वर्ष बच्चों के शिक्षा, स्वास्थ्य हेतु कदम उठाता है व बच्चों के सुखद भविष्य की कामना करता है।

Motive behind the celebration of Universal Children’s Day-

Universal Children’s Day का उद्देश्य बच्चों को उनके विकास के लिए आवश्यक साधन उपलब्ध करवाना है, ताकि बच्चों का सामाजिक, आर्थिक, मानसिक व आध्यात्मिक हर क्षेत्र में संपूर्ण विकास हो सके। जो बच्चा बीमार है उन्हें उचित इलाज प्रदान किया जाना चाहिए। जो बच्चा भूखा है उसे पोषक तत्वों से भरपूर खाना प्रदान किया जाना चाहिए। इसी श्रेणी में भारत सरकार भी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को निःशुल्क मिड डे मील की सुविधा उपलब्ध करवाती है। जो बच्चा आर्थिक व मानसिक रूप से पिछड़ा है, उसे तुरंत उचित सहायता प्रदान करवाना व समाज की मुख्यधारा में लाना आदि।

बच्चों को बनाए संस्कारवान-

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पुरातन समय से ही हमारी भारतीय संस्कृति रही है, बच्चों को अच्छे व नेक संस्कार देना। लेकिन आज के दौर में लोग अपने आप में इतना व्यस्त रहते हैं कि अपने बच्चों की तरफ ध्यान नहीं दे पाते। हमारी सभ्यता विश्व में सबसे महान रही है। हमारे यहां जब से मां गर्भधारण करती है, तब से उसका सारा ध्यान उसके बच्चे की तरफ होता है। वह भारतीय मां ही होती है जो अपने बच्चे को सुखे में सुला कर खुद गीले में सो जाती है। हमें अपने भारतीय संस्कृति को नहीं भूलना चाहिए व बच्चों को बचपन से ही अच्छे संस्कार देकर संस्कारवान बनाना चाहिए।

  1. बच्चे की माता गर्भावस्था के दौरान धार्मिक ग्रन्थ, शूरवीर योद्धाओ की कहानी पढ़े जिससे बच्चे में गर्भावस्था के दौरान अच्छे संस्कार जाएं-
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बच्चे एक नन्ही कली की तरह होते हैं। जब से बच्चे मां के गर्भ में आते हैं, तभी से वह सीखना शुरु कर देते है। जैसे आपने सुना होगा महाभारत के समय में अर्जुन के पुत्र अभिमन्यु ने अपनी माता के गर्भ में ही चक्रव्यूह तोड़ना सीख लिया था। अर्थात् बच्चे मां के गर्भ से ही सीखना शुरू कर देते हैं। इसलिए माता का कर्तव्य बनता है कि वह गर्भावस्था में ईश्वर की भक्ति इबादत करें, शूरवीर योद्धाओं की कहानियां व पवित्र ग्रंथ पढ़े। जिससे बच्चा जब जन्म लेगा तो वह शूरवीर योद्धा व महान बनेगा और देश के उज्जवल भविष्य में अपना योगदान देगा।

2. बच्चे को निडर और बहादुर बनाएं-

बहुत से माता-पिता बच्चों को बचपन में बहुत डराते है। उदाहरण के लिए माता-पिता अपने बच्चे को बोलते हैं माउ आ गया, वो तूझे उठाकर ले जाएगा। जिससे बच्चे के दिलो-दिमाग में डर बैठ जाता है और वह बच्चा साहसी बनने की बजाय एक डरपोक बनकर रह जाता है। इसलिए माता-पिता का कर्तव्य बनता है कि वह अपने बच्चे को निडर बनाए ताकि बच्चा बड़ा होकर किसी परेशानी से घबराए ना बल्कि डटकर उसका सामना करें।

3. बच्चों को अच्छी शिक्षा दे-

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बहुत से अभिभावक अपने बच्चों की गलतियों पर पर्दा डाल देते हैं। जो आने वाले समय में बड़ी समस्या का कारण बन सकता है। ऐसे में माता-पिता का कर्तव्य बनता है कि वह अपने बच्चे को उसकी गलती का एहसास करवाएं व उसे अच्छी नेक शिक्षा दें। उसे बड़ों का आदर सम्मान करना सिखाए व अपने बड़ों के पांव छूना, उन्हें नमस्ते, धन धन सतगुरु तेरा ही आसरा कहने की आदत बचपन से ही डाले।

4. बच्चों को नए-नए अनुभव दे-

जब भी माता-पिता बच्चे को कहीं बाहर घूमने ले जाए, तो उन्हें हर चीज की जानकारी दें। उस जगह की, वहां के लोगों की व उनके रहन-सहन की इससे बच्चों का ज्ञान बढ़ेगा।

5. बच्चों को प्रकृति से जोड़े-

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माता-पिता का कर्तव्य बनता है कि वह बच्चों को बचपन से ही प्रकृति से जोड़े व उन्हें हर त्योहार जैसे उनके जन्मदिन आदि पर पौधारोपण करने के लिए प्रोत्साहित करे। जिससे हमारा पर्यावरण हरा-भरा होगा और आने वाली पीढ़ियो का भला होगा।

6. बच्चों में डाले पक्षियों को दाना डालने की आदत-

बच्चों को बचपन में अगर अच्छे संस्कार दिए जाएं तो आने वाले समय में वह बच्चा एक अच्छे व्यक्तित्व का निर्माण करता है। इसीलिए माता-पिता का कर्तव्य बनता है कि वह बचपन से ही बच्चों में बेजुबान पशु-पक्षियों के लिए भोजन व पानी डालने की आदत डालें। क्योकि यह हमारी भारतीय संस्कृति भी रही है।

7. बच्चों को घर के काम भी सिखाए-

बच्चों के पढ़ने-लिखने व खेलने कूदने के साथ-साथ माता-पिता का कर्तव्य बनता है कि वह बच्चों को समय-समय पर घर के छोटे-छोटे काम भी करना सिखाए ताकि अगर बच्चे पढ़ने के लिए कहीं बाहर जाए तो वह इसके लिए पहले ही तैयार रहे, उन्हें काम करने में किसी समस्या का सामना ना करना पड़े।

8. बच्चों को भक्ति से जोड़े -

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माता पिता का कर्तव्य बनता है कि वह बच्चों को दुनियावी ज्ञान के साथ-साथ अध्यात्मिक ज्ञान भी अवश्य कराएं, उन्हें राम नाम से जोड़े, ताकि आने वाले समय में एक अच्छे व्यक्तित्व का निर्माण हो। वह बच्चा अच्छा नेक इंसान बनकर मानवता की सेवा करें व अपने माता-पिता का नाम रोशन कर सकें।

9. बच्चों को अंधविश्वास से दूर कर उन्हें विज्ञान से जुड़े-

माता-पिता का कर्तव्य बनता है कि वह अपने बच्चों को अंधविश्वास जैसी रूढ़िवादी बातों से दूर रखें व उन्हें विज्ञान से जोड़े। बच्चों को विज्ञान विषय में नई-नई जानकारी दें। रात में अंतरिक्ष, तारों, ग्रह आदि के विषय में उन्हें बताएं जिससे उनके ज्ञान में वृद्धि होगी।

भारतीय संस्थाओ द्वारा बाल हित में उठाए गए कदम-

हमारे समाज की बच्चों के प्रति एक विशेष जिम्मेदारी होती है। उनका पालन पोषण माता-पिता, व्यस्को व पूरे समाज पर निर्भर करता है। समाज के अनेक संस्थाएं बच्चों के संपूर्ण विकास हेतु अग्रसर है, अनेकों NGOs बच्चों के बेहतर भविष्य हेतु कार्य करते हैं। भारतीय संविधान में भी बच्चों के लिए अधिकार सुनिश्चित किए गए हैं। जो इस प्रकार है-

- जीवन का अधिकार

- पोषण का अधिकार

- शिक्षा का अधिकार

- स्वास्थ्य का अधिकार

विश्व विख्यात संस्था — डेरा सच्चा सौदा

डेरा सच्चा सौदा एक ऐसी संस्था जो विश्व भर में मानवता भलाई कार्यो के लिए प्रसिद्ध है। इस संस्था द्वारा बाल हित के लिए भी विभिन्न कदम उठाए गए हैं। जो इस संस्था के प्रमुख संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की रहनुमाई में हुए हैं और आज करोड़ो लोग इन मानवता भलाई के कार्यो को नई गति दे रहे हैं। आइए जानते हैं डेरा सच्चा सौदा द्वारा चलाए गए उन initiatives के बारे में जो बच्चों के हित के लिए चलाए गए हैं -

  1. Royal Daughters-
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जिन बच्चियों को उनके माता-पिता द्वारा बचपन में ही मार दिया जाना था व कुछ को कचरे के ढेर में फेंक दिया जाना था, उन बच्चियों को पूज्य गुरु संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सा ने अपनाया और उन्हें नाम दिया शाही बेटियां। पूज्य गुरु जी ने उनके माता-पिता के नाम की जगह उन बच्चियो को अपना नाम दिया है। आज वह बच्चियां सीबीएसई स्कूल में पढ़ती है और उनमे से कई लड़कियां गोल्ड मेडलिस्ट है। ये बच्चियां आज पढ़ाई व खेलों में अपने देश व अपने गुरु पापा का नाम रोशन कर रही हैं। पूज्य गुरु जी ने इन बच्चियो के रहने के लिए शाही बेटियां आश्रम का निर्माण किया। जिसमें अब तक 29 से अधिक बेटियां आ चुकी है।

2. शाह सतनाम जी आसरा आश्रम (Royal Shelter)-

जिन बच्चों को समाज ने ठुकराया, बाल मजदूरी में फसाया व जो बच्चे अनाथ हो चुके हैं। उन बच्चों के लिए बने सहारा बने डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख ने संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां। इन बच्चों के लिए पूज्य जी ने शाह सतनाम जी आसरा आश्रम का निर्माण 11 नवंबर 2004 को किया। इस आश्रम में अब तक 42 से अधिक लड़के आ चुके हैं। इनकी शिक्षा का सारा प्रबंध पूज्य गुरु संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह जी इंसा द्वारा किया जाता है व इनके माता-पिता के स्थान पर पूज्य गुरु जी ने अपना नाम दिया है। ये बच्चे पूज्य गुरु जी को अपने माता-पिता मानते हैं।

3.Education Endowment-

यह मुहिम पूज्य गुरु संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां द्वारा चलाई गई है। इस मुहिम के तहत गरीब व जरूरतमंद बच्चों के लिए डेरा सच्चा सौदा के द्वारा फ्री कोचिंग सेंटर खोले गए हैं। जिसमें उन गरीब व जरूरतमंद बच्चों को निःशुल्क शिक्षा प्रदान कराई जाती है।

4. Save the tiny hardship-

इस मुहिम का एकमात्र उद्देश्य बच्चों को मजदूरी करने से रोकना व उनकी शिक्षा को बढ़ावा देना है। पूज्य गुरु जी की पावन प्रेरणा से डेरा सच्चा सौदा के लाखों अनुयायी गरीब व जरूरतमंद बच्चों को मजदूरी से हटाकर उन्हें शिक्षा से जोड़कर इंसानियत का फर्ज निभाते है। अब तक ये डेरा अनुयायी हजारों बच्चों को शिक्षा से जोड़ चुके हैं।

5. Real Education-

डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां द्वारा चलाई गई इस मुहिम के तहत बच्चों के लिए डेरा सच्चा सौदा में समय-समय पर career counselling का आयोजन किया जाता है। इसमें बच्चों को शिक्षा से जुड़ी विभिन्न जानकारीया दी जाती है और बच्चों को शिक्षा का महत्व भी बताया जाता है।

6. Pathway to light-

डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने blind व dumb बच्चों के लिए अलग से स्कूल खोलने का आह्वान किया है।

7. Education Enrollment-

इस initiative के तहत डेरा सच्चा सौदा के लाखों अनुयाई गरीब व जरूरतमंद बच्चों की पढ़ाई का सारा खर्चा अपने सिर पर उठाते हैं। उन्हें शिक्षा से संबंधित जरूरी सामान मुहैया करवाते हैं। ऐसा करके ये डेरा अनुयायी समाज व देश को उज्जवल बनाने में अपना अहम योगदान देते हैं।

8. Food Bank-

बच्चों की शिक्षा के साथ-साथ ये डेरा सच्चा सौदा के अनुयायी गरीब व जरूरतमंद बच्चों के स्वास्थ्य व खाने पीने का भी ध्यान रखते हैं। कोई बच्चा भूख से ना तड़पे इसके लिए डेरा सच्चा सौदा द्वारा हर जिले में ब्लाक स्तर पर फूडबैंक खोले गए हैं, जहां से गरीब व जरूरतमंद बच्चों को भोजन दिया जाता है।

9. Smile on innocent face-

बच्चों के चेहरे पर मुस्कुराहट लाने के लिए डेरा सच्चा सौदा के अनुयाई smile on innocent मुहिम के तहत गरीब व जरूरतमंद बच्चों को खिलौने व स्टेशनरी का सामान मुहैया कराते हैं।

Source of inspiration-

इसका सारा श्रेय डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह जी इंसा को जाता है। जिन्होंने अपने करोड़ो अनुयायियों में मानवता की सेवा का जज्बा भरा है। आज करोड़ों अनुयायी गरीब व जरूरतमंद बच्चों को शिक्षा दिलाने में अपना अहम योगदान दे रहे हैं व उनकी पढ़ाई का सारा खर्च भी अपने सर पर उठा रहे हैं।

Conclusion-

इस Universal Children’s Day पर हम सभी को बच्चों के उज्जवल भविष्य बनाने व उचित शिक्षा दिलाने का प्रण लेना चाहिए।

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