ध्यान को अपने जीवन का हिस्सा बनाकर, ले खुशनुमा जिंदगी का आनंद

आज के समय में हर व्यक्ति की तमन्ना रहती है कि वह अपना जीवन खुशी से व्यतीत करें। उसे कोई गम, दुःख-दर्द, तकलीफ ना आए। लेकिन क्या ऐसा हो पाता है? क्या आज का व्यक्ति खुश है? कई बार बहुत से सवाल हमारे दिमाग में आते हैं। जैसे कि क्या हम जीवन का आनंद लेने के लिए पैदा हुए हैं? अगर हां! तो हम सभी को गम, दुःख-दर्द, परेशानियों और बाधाओं से क्यों गुजरना पड़ता है? यदि जिंदगी में दुख दर्द ना हो तो जीवन कैसा होगा? अगर जीवन में कोई समस्या ना हो तो क्या होगा?

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वैस आप सभी ने यह बात तो अवश्य ही सुनी होगी कि ध्यान/meditation हर समस्या का समाधान है। जो लोग ध्यान का निरंतर अभ्यास करते हैं, वो हमेशा खुश रहते हैं। कोई दुख उन्हें परेशान नहीं करता। क्या यह वास्तव में सच है? क्या इसके पीछे कोई वैज्ञानिक आधार है?

तो आइए हम इस विषय पर अधिक जानकारी प्राप्त करें और जाने की ध्यान की विधि क्या है।

सच्चा ध्यान क्या है?

ध्यान का अर्थ- बाहरी दुनिया को छोड़कर अंदर से जाग लगाना। बहुत से लोग मंत्रों के द्वारा ध्यान लगाते हैं, वहीं कुछ लोग अपने विचारों पर ध्यान केंद्रित करते हैं और कुछ संगीत के माध्यम से अपना ध्यान केंद्रित करते हैं। आपको बता दें कुछ लोग ऐसे भी हैं जो बाहरी वस्तु पर ध्यान केंद्रित करते हैं। इसी को ध्यान कहते हैं।

लेकिन हमारे वेदों और सभी धर्मों के अनुसार ध्यान की विधि को सच्चे गुरु द्वारा ही सिखाया जाता है।

ध्यान एक मंत्र है जो व्यवहारिक रूप से एक अध्यात्मिक गुरु द्वारा स्वयं प्रशिक्षण किया जाता है। अर्थात् वह ध्यान की विधि जिसका गुरु स्वयं अभ्यास करें और उसे भगवान की प्राप्ति हो गई हो। उसे सच्चा गुरु मंत्र/ध्यान की विधि कहा जाता है। जो वह अपने शिष्य को देता है।

इसे धर्मों के अनुसार अलग-अलग नाम दिए गए हैं। जैसे गुरु मंत्र, नाम शब्द, भगवान के शब्द, बांग-ए-इलाही, कलमा आदि कहा जाता है। यदि इसका सही तरीके से अभ्यास किया जाए तो यह आत्मा को उच्च लोकों तक पहुंचाता है। डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां द्वारा करोड़ो लोगों को गुरुमंत्र की प्राप्ति हुई है।

Meditation कैसे काम करता है?

हमारे मानव शरीर के अंदर आत्मा निवास करती है। जो हमारी हर भावना के लिए हर तरह से जिम्मेवार होती है। अगर आत्मा शरीर से चली जाती है, तो इंसान की मृत्यु हो जाती है। हमारे दुःख और नकारात्मक विचार हमारी आत्मा के द्वारा ही बनते हैं। अंततः हमारा शरीर और दिमाग नाजुक होता है।

पूज्य गुरु जी संत डॉ गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते है कि जैसे शरीर को कुशलता से काम करने के लिए एक उचित आहार की आवश्यकता होती हैं, ठीक वैसे ही हमारी आत्मा को भी भोजन की आवश्यकता होती है।

जब हम ध्यान लगाते हैं, तो आत्मा को पोषण मिलता हैं और वह बलवान बनती है। हमारे सोचने समझने की शक्ति बढ़ती है। जिस सवाल का जवाब हमें नहीं मिल पाता वह मालिक के नाम का निरंतर अभ्यास करने से आसानी से मिल जाता है। क्योंकि Meditation के द्वारा हम mind में ऑक्सीजन पहुंचा सकते हैं। जिससे बहुत सी बीमारियों से भी बचा जा सकता है। आत्मविश्वास बढ़ता है, व्यक्ति दुखों से छुटकारा पा सकता है।

Meditation करने का उचित समय

Meditation को आप दिन में किसी भी समय और किसी भी स्थान पर कर सकते हैं। पूज्य गुरु जी संत गुरमीत राम रहीम सिंह जी फरमाते हैं कि सिमरन करने के लिए ब्रह्ममुहूर्त का समय सबसे अच्छा है अर्थात् 2 से 5 का समय ध्यान के लिए सबसे उत्तम है। क्योंकि इस समय ऑक्सीजन की मात्रा ज्यादा होती हैं और हवा शुद्ध होती है। इस बात को साइंस भी मान चुकी है।

पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि ईश्वर की भक्ति को किसी भी समय किया जा सकता है। उनका कहना है कि जब आपका कोई शारीरिक कार्य कर रहे हैं। जैसे अगर आप गाड़ी चला रहे हैं, तो आप हाथों-पैरों से गाड़ी चलाते रहे और जीभा से ईश्वर की भक्ति करते रहे। इस से आपका सफर भी अच्छा रहेगा और आपको उस काम में सफलता भी मिलेगी और ईश्वर की भक्ति भी हो जाएगी।

Meditation कैसे करें?

- ध्यान करने के लिए आप एकांत जगह पर बैठे।

- आप सुखासन में या कुर्सी पर बैठ सकते हैं।

- अपने आप को शांत करें।

- अब अपनी आंखों को बंद करें और अपनी आंखों के बीच के अपनी नाक के ऊपर ध्यान केंद्रित करें। जिसे ज्ञान चक्षु या दसवां द्वार भी कहते हैं।

- अब गुरु मंत्र को लगातार दोहराए।

- आप 10 मिनट से शुरुआत कर सकते हैं। 10 मिनट और 10 मिनट शाम।

- इस समय को धीरे धीरे बढ़ाते जाएं।

Benefits of Meditation

आपको बता दें लगातार meditation का अभ्यास करने के विभिन्न फायदे हैं। जैसे:

दुःखों-बिमारियों से राहत

मालिक का नाम लेने से इंसान भयंकर बीमारियों से मुक्ति पा सकता है। मालिक का नाम एक ऐसा साधन हैं, जो इंसान को कभी भी अकेला नहीं होने देता जब आप अकेले हैं। मालिक का नाम अगर आपके पास है, तो आप हर समस्या का हल पल भर में कर सकते है। लगातार ध्यान करने से आत्मबल बढ़ता हैं और जो दवाई पहले 10% काम करती थी। ईश्वर की भक्ति करने से वही दवाई 100% काम करती है और इन्सान बीमारियों से जल्दी निजात पा लेता है।

Meditation करने से पढ़ाई में रूचि

पूज्य गुरु संत गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां रुहानियत के साथ-साथ दुनियावी शिक्षा भी देते हैं। वो फरमाते है कि अगर आपका पढाई में मन नहीं लगता, तो आप पढ़ने से 5 मिनट पहले सिमरन करे और फिर पानी पीकर थोड़ा सा घूमने पर पढ़ने के लिए बैठ जाए। इससे आपका पढ़ाई में मन लगने लगेगा और पढ़ा हुआ दिमाग में फिट हो जाएगा।

पाप-कर्मों से बचाव

ईश्वर के नाम का निरंतर अभ्यास करने से व्यक्ति को अच्छे-बुरे की समझ आती है। जिस से वह बुरे कर्म करने से परहेज करता है।

अभाग्यशाली से भाग्यशाली

पूज्य गुरु गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां जी फरमाते है कि इंसान को गुरुमंत्र बहुत नसीबो से मिलता है। सिमरन करने से भाग्य बदल जाते हैं। मालिक का नाम जब इंसान को मिल जाता हैं और अगर वह उसका लगातार सिमरन करता है। तो वह अभाग्यशाली से भाग्यशाली बन जाता है।

आत्मबल में वृद्धि

आत्मबल सफलता की कुंजी है। मालिक का नाम लेने से आत्मबल बढ़ता है, उससे इंसान की गम, दुःख, चिंताएं खत्म होने लगती है। मालिक का नाम सुखों की खान है। जितना ज्यादा जीव गुरुमंत्र का जाप करेगा उसे कई गुना बढ़कर खुशियों मालिक आपकी झोली में भरता जाएगा। मालिक का नाम लेने से आप अंदर, बाहर खुशियों से मालामाल हो सकते है।

ईश्वर का नाम लेने से परमानंद प्राप्ति

पूज्य गुरु संत डॉ गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि अगर इंसान परमानंद की प्राप्ति करना चाहता है। तो उसे लगातार प्रभु की याद में बैठना चाहिए। मनुष्य शरीर ही एकमात्र ऐसा जरिया है। जिसमे आत्मा आवागमन से आजादी प्राप्त कर सकती है। जीव को मनुष्य जुनी में मालिक की भक्ति इबादत करनी चाहिए। जिससे इंसान गम, दुख, चिंताओं से मुक्ति पा सकता है।

तनाव मुक्त जीवन

लगातार गुरुमंत्र का जाप करने से आत्मबल बढ़ता हैं। जिस से इन्सान के सोचने का स्तर बढ़ता हैं और वह अपनी परेशानियों को आसानी से हल कर लेता है और वह इंसान तनाव मुक्त जीवन व्यतीत करता है।

Meditation के आध्यात्मिक लाभ

पूज्य गुरु जी संत डॉ गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते है कि राम के नाम का निरंतर अभ्यास करने से इंसान के सोचने की क्षमता बढ़ती है। गुरु जी फरमाते है कि कि इंसान अपने दिमाग का केवल 15 से 20% इस्तेमाल करता है। अगर वही इंसान गुरुमंत्र का निरंतर अभ्यास करें तो वह अपने सोचने की क्षमता को कई गुणा बढ़ा सकता है।

Meditation With Pranayama

पूज्य गुरु संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि अगर ध्यान के साथ प्राणायाम किया जाए तो सोने पर सुहागा है। इससे इच्छा शक्ति बढ़ती है और व्यक्ति को हर समस्या का समाधान अपने अंदर अंतर आत्मा से मिल जाता हैं और व्यक्ति को तनाव से मुक्ति मिलती है।

Benefits:

1. Meditation के साथ प्राणायाम से शरीर का रक्तचाप व तापमान सामान्य रहता है। इससे मानसिक तनाव कम होता व चिंता दूर होती है।

2. प्राणायाम से हमारी सांस लेने की प्रक्रिया में सुधार होता है।

3. ध्यान के साथ प्राणायाम करने से एकाग्रता बढ़ती है, जिसके द्वारा आध्यात्मिक व मानसिक विकास में मदद मिलती है।

4. यह हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity Power) को बढ़ाने में भी सहायता करता है।

एक पूर्ण संत जो ध्यान की सही विधि सिखाता है:

एक पूर्ण संत के द्वारा ही ध्यान की विधि को प्राप्त किया जा सकता है। जिसे उस संत ने अपने आप दोहराया हो, उसे ही वह अपने शिष्य को देता है।

एक सच्चा संत गुरुमंत्र/Meditation की विधि देने के बदले कोई दान चढ़ावा नहीं लेता, किसी का धर्म परिवर्तन नहीं करवाता। सच्चा संत कभी मांग कर नहीं खाता, वह खुद भी मेहनत करके खाता हैं और दूसरों को भी मेहनत की करके खाने की शिक्षा देता है। सच्चा संत निःस्वार्थ भाव से मानवता की सेवा करता है।

संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां, जिन्होंने 6 करोड़ लोगों को ध्यान की सच्ची विधि बताई। गुरुजी ने 6 करोड़ लोगों को मानवता इंसानियत का सच्चा मार्ग दिखाया है। आज करोड़ो लोग ध्यान की विधि को अपना रहे है और जीवन में सफलताओं को हासिल कर रहे हैं। डेरा सच्चा सौदा के करोड़ों अनुयायी लोगों को राम-नाम से जोड़कर नेक कार्य कर रहे हैं।

निष्कर्ष:

Meditation के निरंतर अभ्यास से हम सभी अपने जीवन को बेहतर बना सकते हैं। इसलिए हम सभी को ध्यान करने की आदत को अपनी दिनचर्या में शामिल करना चाहिए।

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