मनुष्य भगवान की बनाई हुई एक सर्वश्रेष्ठ कलाकृति है। मनुष्य शरीर का एक-एक अंग किसी न किसी खास वजह से बनाया गया है। जैसे सुनने के लिए कान, सूंघने के लिए नाक, खाने के लिए जिह्वा व देखने के लिए आंखे।

सोचिए यदि आपको बिना आंखों के जीना पड़े तो…..इस विचार से ही डर लगता है ना?

तो सोचिए उन लोगों का जीवन कैसा होता होगा जिनके पास बचपन से ही देखने की दृष्टि नहीं है या फिर जो किसके accident की वजह से अपनी आंखों की रोशनी खो चुके हैं।

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भारत में गभग 6.2 करोड़ लोग आंखों की रोशनी से वंचित हैं।

सिर्फ आंखें ही नहीं ऐसे जाने कितने लोग हैं जो अपने शरीर के किसी न किसी अंग के न होने से जिंदगी और मौत से लड़ रहे हैं।

ज़िन्दगी में कठिनाईयों की बाढ़-

दुनिया में किसी भी इंसान को अगर किसी एक अंग की कमी में जीना पड़ जाए तो यह उसके लिए किसी जंग से कम नहीं है। फिर वो अंग चाहे बाहरी हो या आंतरिक, उसके न होने से कितनी तकलीफ का समाना करना पड़ता है यह केवल वही इंसान जानता है तो इस परिस्थिति से जूझ रहा हो।

आसानी से नहीं मिलते इंसानी अंग-

आंख, दिल, गुर्दे, लिवर जैसे sensitive अंग सिर्फ़ जन्म के साथ ही मिल सकते हैं जिन्हें किसी प्रोयगशाला में नहीं बनाया जा सकता या फिर ये अंग तब मिलते हैं जब कोई और इंसान अपनी आंखे या अपना शरीर दान करे। लेकिन ऐसा कोई मृत्यु के उपरांत ही करने को राजी होगा और तब भी इंसानी अंग आसानी से कहाँ उपलब्ध होते हैं। क्योंकि अधिकतर मामलों में मरने वाले के रिश्तेदार ही तैयार नहीं होते और वे लोग मृतक का दाह संस्कार कर देते हैं। ऐसे में इन लाचार लोगों को कौन देगा आंखे या शरीर के ये अनमोल अंग?

जब ऐसे असहाय लोगों के लिए रूहानी संत ने किया एक अनोखी पहल का आगाज़-

हमारे देश में ऐसे लाखों लोग हैं जो आज भी समय पर दिल, गुर्दा, लिवर जैसे अंग transplant न होने पर अपनी ज़िन्दगी गंवा देते हैं। ऐसे रोगियों व नेत्रहीन लोगों की सहायता करने के लिए डेरा सच्चा सौदा संस्था के प्रमुख संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां द्वारा एक ऐसा सामाजिक कार्य शुरू किया गया है, जिसके बारे में सोचना किसी के बस की बात नहीं है। यह मानवता भलाई का कार्य है- Posthumous Eye Donation and Body Donation।

तो आइए जानते हैं, क्या है यह नई पहल!

Posthumous Eye Donation and Body Donation Initiative-

यह initiative डेरा सच्चा सौदा के मौजूदा गद्दीनशीन व प्रमुख पूज्य गुरु जी द्वारा उन लोगों के लिए शुरू किया गया जो या तो नेत्रहीन हैं या फिर जिन्हें किसी बड़ी बीमारी के कारण कोई आंतरिक या बाह्य अंग ट्रांसप्लांट करवाने की जरूरत है।

इस मुहिम के तहत डेरा सच्चा सौदा के करोड़ों अनुयायियों ने यह प्रण किया है कि वे मरणोपरांत अपनी आंखें व शरीर किसी जरूरतमंद की मदद के लिए जरूर दान करेंगे।

पूज्य गुरु जी द्वारा चलाई गई इस मुहिम से अब तक हज़ारों नेत्रहीन व अपंग लोगों की ज़िंदगी रोशन हो चुकी है। यही नहीं, अनेकों डेरा श्रद्धालु तो जीते जी भी गुर्दा व लिवर दान कर सैंकड़ों ज़िन्दगियों को आबाद कर चुके हैं।

Research centers के लिए वरदान-

पूज्य गुरु जी के एक आह्वान पर करोड़ों लोग मरने के बाद अपनी आंखें व शरीर दान करने के लिए तैयार हो जाते है और तो और लाखों लोग जहां अपनी आंखें और शरीर दान कर लोगों की नई जिंदगी का कारण बने वहीं डेरा श्रद्धालुओं ने research centers के लिए अपना शरीर दान कर समाज के प्रति अपने फ़र्ज़ को बखूबी निभाया ताकि डाक्टर्स उनके शरीर पर research कर विभिन्न रोगों के लिए इलाज़ तैयार कर सकें।

आसान नहीं होता, इतना बड़ा कदम उठाना-

अपना शरीर यूं ही किसी अजनबी के लिए दान कर देना, यह किसी यज्ञ से कम नहीं है और नेत्रदान व शरीरदान जैसा महादान हर किसी के लिए आसान नहीं है। जहां लोग अपने हिस्से की रोटी तक दूसरे को नहीं देते वहां ये छः करोड़ डेरा श्रद्धालु जीवित या मरणोपरांत अपने नेत्र व शरीर दान का प्रण ले चुके हैं। सलाम है ऐसी सोच व ऐसे ज़ज्बे को।

Source of inspiration for millions-

डेरा सच्चा सौदा के अनुयायियों में ऐसी मानवता भलाई की भावना जगाने वाले व दीन-दुखियों की मदद के लिए उनका सहारा बनने की प्रेरणा देने वाले कोई और नहीं बल्कि उनके spiritual master संत डॉ गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सांं हैं। यही हैं वो शख्सियत जो इन करोड़ों लोगों में इंसानियत को जिंदा रखने का जज्बा भरती है व हमेशा समाज व देश के भले के लिए कार्य करने की प्रेरणा देती है। पूज्य गुरु जी की शिक्षाओं पर चलकर ही आज डेरा श्रद्धालु बिना अपनी जान की परवाह किए कहीं भी जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए पहुंच जाते हैं।

पूज्य गुरु जी की ऐसी शिक्षा को हम नमन करते हैं।

Conclusion-

ज़िन्दगी सभी को एक बार मिलती है। यदि इसमें भगवान की तरफ से कोई कमी रह जाए तो इंसान होने के नाते हमारा फ़र्ज़ है कि हम एक दूसरे की सहायता करें। तो आइए हम भी मरणोपरांत नेत्रदान व शरीर दान का प्रण करें व किसी की ज़िंदगी में रोशनी की नई उम्मीद बनें।

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