अपनी जिंदगी के लिए सही मार्ग चुने: विश्व मार्गदर्शन दिवस 2020

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आजकल के आधुनिक समय में जहाँ हमारा समाज व देश विकसित हो रहा हैं। वहीं दूसरी तरफ विज्ञान भी तरक्की कर ए-नए आयामों को छू रहाँ है। आज के जीवन में अगर हम हर इंसान की जिंदगी में झांक कर देखे तो सबकी जिंदगी में कुछ ना कुछ problems हैं, हर कोई चिंता परेशानियों से जूझ रहा है। परंतु ऐसा कोई इंसान नहीं है, जो अपनी परेशानियों से मुक्त ना होना चाहता हो। अपनी परेशानियों से मुक्ति पाने के लिए कोई किसी की philosophy follow कर रहा है तो कोई किसी को follow कर रहा है। हमारे समाज में अनेकों ऐसे philosopher आए जिन्होने समाज़ को अपनी-अपनी Philosophy के अनुसार जीवन जीने का ढंग बताया। आज हम में से ना जाने कितने लोग तरह-तरह की philosophies को follow कर अपना जीवन खुशी से जी रहे हैं।

Meaning of Philosophy-

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Philosophy का अर्थ- ज्ञान का प्रेम व दर्शनशास्त्र है, जो हमारे जीवन का सही मायनों में अर्थ समझने, अपने जीवन के बारे में मौलिक सत्य को समझने, अपने आस पास हो रहीं गतिविधियों को एकदम सही व स्टीक तरीके से समझने, अपने जीवन की वास्तविकता को पहचानने और सत्य व ज्ञान की खोज करने व आजतक हर व्यक्ति अपने-अपने अनुभव और परिस्थिति के अनुसार philosophy को समझ पाया है।

World Philosophy Day कब मनाया जाता है?

प्रत्येक वर्ष नवम्बर माह के तीसरे गुरुवार को World Philosophy Day के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष यह 19 नवंबर के दिन मनाया जा रहा है।

इसकी शुरुआत वर्ष 2002 में UNESCO (संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, संस्कृतिक और वैज्ञानिक संगठन) द्वारा कि गई थी। इसके बाद 2005 में UNESCO की General Assembly में यह घोषित कर दिया कि विश्व दर्शन दिवस प्रत्येक वर्ष मनाया जाएगा। 21 नवंबर 2002 को पहली बार World Philosophy Day मनाया गया।

Know about the sermons or philosophies who changed the fate of millions-

आज हम World Philosophy Day के 0ccasion सख्शियत की जिनकी philosophy को सैकड़ों, लाखों नहीं बल्कि करोड़ो लोगों ने अपने जीवन में अपनाया और आज खुशहाल जीवन जी रहे हैं। वह संत कोई और नहीं बल्कि डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां है।

आइए जानते हैं एक आध्यात्मिक गुरु की philosophy-

  1. Confluence of all religions-
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पेड़ फलों से भरा, फल एक गला, गला फल है, गला पेड़ कहे ना कोए।

बुराई कर-कर इंसान बुरा हुआ, सारा धर्म बुरा ना होए।।

अर्थात् पूज्य गुरु संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि फल के पेड़ पर अगर एक फल खराब या गल-सड़ जाता है, तो लोग उस पेड़ को गला हुआ नहीं कहते, वह बोलते हैं कि एक फल ही गला है। ऐसे ही अगर कोई इंसान बुरा कर्म करता है, तो केवल वह इंसान ही बुरा होता है। उसका सारा धर्म बुरा नहीं होता। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि धर्म कोई बुरा नहीं होता है, जो इंसान बुरे कर्म करता है, वही बुरा है। फिर चाहे वह किसी भी धर्म से संबंध रखता हो।पूज्य गुरु जी की इस पावन शिक्षा को करोड़ों लोगों ने अपने जीवन में अपनाया और भाईचारे की नई मिसाल कायम की। आज 6 करोड़ से अधिक लोग जात-पात अमीर-गरीब का भेदभाव किए बिना आपस में प्यार से रहते हैं और मानवता की सेवा में अपना योगदान देते हैं।

2. We all are children of God and Humanity is our caste-

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हम सभी एक ही मालिक की औलाद है और इंसानियत ही हमारी जात है। इस पर पूज्य गुरु संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सा फरमाते हैं-

एक ही नूर से, हुकम हजूर से, सारी सृष्टि साजी, भाई, पंडित, काजी, एक ही जात है।।

अर्थात् पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि भगवान एक है और हम सभी की जात इंसानियत है। भगवान ने सारी सृष्टि को एक ही नजर से बनाया है। धर्म-जात आदमी के बनाए हैं। भगवान ने सभी को एक जैसा रूप आकार दिया है। फिर चाहे वह पंडित हो, शूद्र हो या अमीर-गरीब हो। गुरू जी की इस पावन शिक्षा को करोड़ों लोगों ने अपने जीवन में अपनाया और इंसानियत की मिसाल कायम कर खुशहाल जीवन जी रहे हैं।

3. Key to all problems: Meditation-

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सरब रोग का अउखदु नाम। कलियाण रूप मंगल गुण गाम।।

पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि सभी रोगों की मुकम्मल दवा ईश्वर, प्रभु, मालिक, अल्लाह का नाम है। अगर इंसान सही तरीके से बिना किसी ढोंग, दिखावे, पाखंड के ईश्वर की भक्ति का गुणगान करे तो वह इंसान अंदर बाहर से मजबूत होता चला जाता है और उसे आनंद खुशियां की प्राप्ति होती है। बहुत से लोग ईश्वर की भक्ति एकाग्रता बढ़ाने के लिए करते हैं। लेकिन पूज्य पूज्य गुरु संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने लाखों करोड़ो लोगों को ज्ञान कराया कि राम का नाम सभी परेशानियों का मुकम्मल हल है। इसका निरंतर अभ्यास करने से इंसान अपनी तमाम परेशानियों से छुटकारा पा सकता है।

4. God is Omnipresent-

भगवान कण-कण में विराजमान है, ऐसी कौन जगह नहीं है जहां भगवान ना हो। बहुत से Philosopher मानते है की भगवान नहीं है। लेकिन पूज्य गुरु संत डॉ गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की philosophy कहती है कि भगवान कण-कण, जर्रे-जर्रे में है। भगवान ने सारी सृष्टि को बनाया है, जिसमें इंसान, पशु-पक्षी, पेड़-पौधे आदि शामिल है। अजूबे की बात यह है कि सब की बनावट अलग-अलग है, भाई-भाई के हाथ की रेखाएं आपस में नहीं मिलती है। सबसे बड़ी रचना की भगवान ने इंसान का शरीर बनाकर, जिसके शरीर पर एक भी टांका नहीं है। इसके लिए पूज्य गुरु जी फरमाते हैं-

हर घट-घट में हाजिर हजूर है। मालिक हैं अंदर, समझ क्यों दूर है।।

5. Earn Honestly to live happily-

इंसान को मनुष्य जन्म का फायदा उठाना चाहिए व मेहनत की करके खानी चाहिए। इसके लिए पूज्य गुरु जी philosophy है-

हक्क पराया नानका ऊह सुअर उस गाय, गुरु पीर हा माता भरे या मुर्दार ना खाए।।

पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि किसी का हक मारकर नहीं खाना चाहिए। किसी का हक मारना हिन्दू के लिए ऐसे है जैसे गऊ का मांस और मुसलमान के साथ ऐसे है जैसे सुअर का मांस। इसलिए मनुष्य को हमेशा कड़ी मेहनत करके खाना चाहिए। क्योंकि पाप- जुल्म की कमाई इंसान की सुख-शांती छीन लेती है। पूज्य गुरु जी की इस पावन शिक्षा को करोड़ो लोगों ने अपनाया और हमेशा हक़ हलाल व् मेहनत की करके खाने का प्रण लिया।

6. Defeat Ego With Meditation-

अंहकार को हमेशा मार पड़ती हैं। आज तक जिसने भी अहंकार किया उसने हार का सामना किया। रावण का उदाहरण आप सभी ने सुना ही होगा। अंहकार के कारण उसने अपनी कुलों का नाश कर दिया। इसलिए इंसान को अंहकार नहीं करना चाहिए। इसके लिए पूज्य गुरु जी की philosophy है-

जो झुक गया सो पा गया, जो तन गया सो गया।।

इस बारे में पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि एक पेड़ फलों से भरा हुआ है और वह उन फलों के भार में झुक जाता है। तो कोई लोग उसको छेड़ते नहीं है, बल्कि उसके फल खाते हैं। दूसरी ओर खजूर का पेड़ जो हमेशा तना रहता है, ना तो उसकी लकड़ी काम आती है और फल भी उसका बहुत उंचाई पर लगता है। तो लोग उसे पसंद नहीं करते। इसका अर्थ की जो इंसान दीनता नम्रता धारण करके रखता है, उसे हर कोई पसंद करता है दूसरी ओर जो इंसान हमेशा अहंकार में रहता है लोग उस से बात करना भी पसंद नहीं करते हैं। इसीलिए पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि इंसान को अंहकार नहीं करना चाहिए।

7.Key to success — Hard work and Devotion-

इंसान को अपने लक्ष्य के लिए कड़ी मेहनत करनी चाहिए। इसके लिए पूज्य गुरु संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की philosophy है -

हिम्मत करें अगर इंसान तो सहायता करें भगवान।

हिम्मत-ए-मर्दा मदद-ए-खुदा।।

इन दोनों का एक ही अर्थ है की अगर इंसान मेहनत करता है, तो भगवान भी उसका साथ अवश्य देते हैं। अगर इंसान मेहनत नहीं करता, हाथ-पैर नहीं हिलाता और दोष भगवान को देता है कि भगवान हमारी मदद क्यों नहीं करता। भगवान तो मदद करने आते हैं, अगर आप ही सोए पड़े हो तो इसमें दोष इंसान का है, भगवान का नहीं। इसके लिए पूज्य गुरु जी फरमाते हैं-

दोष कर्मा अपणया, जो मैं किया सो मैं पाया, दोष ना दिजे और जना।।

अर्थात् इंसान जैसे कर्म करता है उसका फल उसे अवश्य मिलता हैं। किसी और को दोष देने से कोई फायदा नहीं होता है।

8. Choose Righteous Person Company-

जैसा करो संग, वैसा चढ़े रंग!

पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि अगर आप अच्छे नेक लोगों के पास

जाकर बैठते हो तो जिंदगी में बहुत तरक्की हासिल करोगे, इंसानियत में बहुत आगे जाओगे। लेकिन अगर आप किसी बुराई का संग करते हो तो आपके अंदर बाहर बुरे विचार चलते रहेंगे। इस पर पूज्य गुरु जी की philosophy है-

अगर पास अग्नि के बैठोगे जाकर, तो उठोगे एक दिन कपड़े जलाकर।

अगर पास फूलों के बैठोगे जाकर, तो उठोगे एक दिन कपड़ों में खुशबू बसाकर।।

पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि संग का रंग लाजमी चढ़ता है। अगर आप प्रतिदिन आग के पास जाकर बैठोगे, तो एक दिन अचानक हवा चलेगी और आपका कपड़ा उड़ कर आग पर चला जाएगा। जो आपके कपड़े को जलाकर राख कर देगा। ऐसे ही अगर आप प्रतिदिन फूलों के पेड़ के पास जाकर बैठते हो तो जैसे ही हवा चलेगी आप का कपड़ा उन फूलों पर गिरे पड़ेगा तो आप के कपड़ो से खुशबू आएगी। तो अगर आप लगातार बुरे का संग करते हो तो आप भी एक दिन बुरे बन जाओगे और अगर आप लगातार अच्छे लोगो का संग करते हो तो आप अच्छे नेक इंसान बनते चले जाएंगे।

9. Shun Superstitions Belief -

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पूज्य गुरु जी ने करोड़ो लोगों को पाखंडवाद से बाहर निकाला और ईश्वर की भक्ति का सच्चा रास्ता बताया। इसके लिए पूज्य गुरु जी संत महापुरुषो की philosophy बताते है-

पाखंड में कुछ नाही साधो, पाखंड में कुछ नाही रे।

पाखंडिया नर भोगे चौरासी खोज करो मन माही रे।।

आज समाज में पाखंडवाद बढ़ता जा रहा है। लोग पेड़-पौधो पर धागे बांधकर मन्नत मागते है। बेज़बान जानवरों की बली देते हैं। जो एक घोर अपराध है। ऐसा करने से इंसान को भगवान की प्राप्ति नहीं हो सकती। पूज्य गुरु जी ने करोड़ो लोगों को इसके लिए जागरूक किया और लोगों ने गुरू जी की इस बात पर अमल किया व आज खुशनुमा जिंदगी का आनंद लें रहे हैं।

10. Recite Method of Meditation to get Salvation-

इंसान को मनुष्य जन्म चौरासी लाख जूनिया भोगने के बाद मिलता है। इसलिए इंसान को इसका फायदा उठाना चाहिए। पूज्य गुरु संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने करोड़ों लोगों को आवागमन व मोक्ष मुक्ति का सच्चा रास्ता बताया जिससे इंसान आवागमन से मुक्ति प्राप्त कर सकता है व जीते जी तमाम दुःख परेशानियों से आज़ादी हासिल कर सकता है।

11.Never backbite or condemn others-

पूज्य गुरु संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि हमें किसी की निंदा चुगली नहीं करनी चाहिए व इस से परहेज करना चाहिए। क्योंकि किसी की एक निंदा 100 गुणों का घात करने के समान है इस पर पूज्य गुरु जी की Philosophy है-

परनीन्दा सौ गऊ घात समाना।।

Or

निंदा भली किसी की नाही, सौ गऊ मुग्ध करण, मुंह काले तिन नींदका, नर्के घोर पवन।।

Conclusion-

इस World Philosophy Day पर आप भी पूज्य गुरु संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की philosophy को अपने जीवन में अपनाएं और करोड़ो लोगों की तरह इस खुशनुमा जिंदगी का आनंद लें।

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