एल्युमीनियम व नॉन-स्टिक बर्तनों का इस्तेमाल बन सकता है- रोगों के लिए बुलावा

एक समय था जब भारतवर्ष की संस्कृति और ज्ञान का परचम सारे विश्व में लहरा रहा था। परंतु आज हम स्वयं ही अपने संस्कारों को भूलते जा रहे हैं। सोने की चिड़िया कहलाने वाला देश आज अंदर से खोखला होता जा रहा है। लोगों को स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है क्या आप जानते हैं इसके पीछे क्या कारण हो सकता है?

Image for post
Image for post

आपको बता दे, आज के समय में लोगों प पश्चिमी सभ्यता का असर ज्यादा है। लोग अपनी रसोई को पश्चिमी रंग में डाल रहे हैं। लोग अपने रसोई घरों में बिजली के गैजेट्स, विदेशी मसाले व शानदार बर्तन आदि रखकर रसोई को शानदार बनाने में लगे हुए हैं। शहरीकरण और बदलती जीवन शैली ने यह सुनिश्चित कर दिया है कि सस्ते लोहे की कड़ाही को महंगे नॉन स्टिक पैन से बदल दिया जाए, रेफ्रिजरेटर में प्लास्टिक की बोतलों के साथ मटके की परंपरा को बदल दिया जाए व माइक्रोवेव आदि के साथ पीतल व तांबे के बर्तनों को बदल दिया जाए। लेकिन क्या आपने सोचा है कि ऐसे बर्तनों का उपयोग करना सुरक्षित और स्वस्थ है। भारतीय लोगों ने में इस विषय को लेकर जागरूकता की कमी है वे इन आधुनिक बर्तनों से काफी आकर्षित होते हैं। जो उनके स्वास्थ्य पर प्रभाव डालते हैं और उन्हें अंतर से खोखला कर रहे हैं। आइए जानते हैं इस विषय पर संपूर्ण जानकारी:

हमारे स्वास्थ्य और रोगों का कारण- हमारा रसोईघर

आप शायद माने या ना माने लेकिन हमारी रसोई हमारी सेहत को बनाए रखती है। स्वास्थ्य जीवन और रोगों की शुरुआत हमारे रसोईघर से होती है। विभिन्न रोगों के उपचार हमें हमारी रसोई घर से ही मिल जाते हैं। जैसे इलायची, मुलेठी, अजवाइन, तुलसी आदि।

हमारा स्वास्थ्य इस बात पर निर्भर करता है कि हम क्या खाते हैं, कैसे खाते हैं और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भोजन कैसे और किस प्रकार के बर्तन में पकाया जाता है। भोजन को आग पर पकाने से यह आसानी से पच जाता है और इसकी गुणवत्ता भी बढ़ जाती है। वे बर्तन जिसमें भोजन को पकाया जाता है वह हमारी सेहत पर विशेष महत्व रखते है।

Aluminum के बर्तनों का इस्तेमाल खतरनाक साबित हो सकता है-

आज के समय में ज्यादातर रसोई घरों में हल्के, सस्ते व जंग रहित बर्तनों के रूप में एलुमिनियम से बने बर्तनों का को बढ़ावा दिया जाता है। जिनमें खाना जल्दी बन जाता है और इसको साफ करने में आसानी रहती है। लेकिन शोध में यह पाया गया है कि aluminium के बर्तन हमारे मानव शरीर के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं। विशेष रूप से इनमें नमकीन भोजन पकाने से रासायनिक प्रतिक्रिया होती है जो हमारे भोजन में विष का काम करती है।

हमारे भारत देश में आजादी से पहले अंग्रेजों का शासन था। वो हमारे भारतीय लोगों पर बहुत अत्याचार करते थे और उन्हें बंदी बनाकर जेल में डाल देते थे। British भारत में, एलुमिनियम के बर्तनों में उन भारतीय कैदियों को भोजन परोसने थे। वे एलुमिनियम के बर्तनों का इस्तेमाल इसलिए करते थे, क्योंकि यह एक धीमा जहर है, जो धीरे-धीरे उनके गुर्दों और फेफड़ों को प्रभावित करता था। एलुमिनियम के बर्तनों में खाना पकाना अधिक खतरनाक है। एलुमिनियम के बर्तनों में जब हम खाना पकाते हैं, तो उसमें मौजूद एलुमिनियम ऑक्साइड रसायन हमारे शरीर के अंदर प्रवेश करता हैं और इकट्ठा हो जाता है और मानव शरीर इतने एलुमिनियम को शरीर से बाहर करने में असमर्थ होता है। जो हमें अंदर से खोखला कर देता है। अगर 5 से 6 महीने तक लगातार एलुमिनियम के बर्तन में खाना पकाया जाता है, तो वह बर्तन हल्के होने लगते हैं और जानलेवा बीमारियों का कारण बनते हैं। इससे होने वाली बीमारियां-

- हाइपरटेंशन

- पेप्टिक अल्सर

- खट्टी डकार

- पेट की गैस

- खुजली

- रूसी

- आंत की सूजन

- हड्डियों की कम वृद्धि होना आदि बीमारियां होने का खतरा बना रहता है।

Side effects of non stick utensils-

नॉन-स्टिक बर्तनों का इस्तेमाल जितना आपके काम को आसान बनाता है, उतना ही सेहत के लिए नुकसानदेह भी है। नॉन-स्टिक बर्तनों पर teflon की coating की जाती है जिस से इस पर तेल नहीं चिपकता। लेकिन यही coating आपकी हेल्थ के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। इस coating में मौजूद हानिकारक तत्व हमारे शरीर को कई बीमारियों से ग्रसित कर सकते हैं।

Non-stick बर्तनों में खाना पकाने से आपको thoiroid, हड्डियों के रोग, कैंसर व heart attack जैसी समस्या हो सकती है। यही नहीं इन बर्तनों का इस्तेमाल से प्रजनन समस्या का भी खतरा बना रहता है।

नॉन-स्टिक बर्तनों के इस्तेमाल से कॉग्निटिव-डिसऑर्डर जैसी बीमारी भी हो सकती है।

इस से आपका immunity system भी कमज़ोर हो जाता है, जिस से लीवर तथ किडनी के रोग भी हो सकते हैं।

Millions shun the use of aluminium utensils and non-stick cookware:

डेरा सच्चा सौदा एक ऐसी संस्था है, जो परहित व समाज की भलाई के विभिन्न कार्य करती है। डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की पावन प्रेरणा से आज करोड़ों लोग एलुमिनियम और नॉन स्टिक बर्तनों का इस्तेमाल न करने का प्रण ले चुके हैं। इन बर्तनों के स्थान पर यह डेरा सच्चा सौदा के अनुयायी मिट्टी के बर्तन, लोहे के बर्तन, तांबे, पीतल व स्टील के बर्तनों का इस्तेमाल करते हैं। जो हमारी सेहत के लिए फायदेमंद है।

आइए जानते हैं कुछ ऐसे बर्तनों के बारे में जो हमारे शरीर के लिए फायदेमंद है-

1. मिट्टी के बर्तन-

मिट्टी के बर्तन सभी प्रकार के बर्तनों में सबसे अच्छे होते हैं। इनमें खाना बनाने पर 1% का भी नुकसान नहीं होता। इसमें खाना बनाने के केवल फायदे ही फायदे हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दे, मिट्टी के बर्तन में भोजन पकाने से पोषक तत्व मिलते हैं। जो हमारे शरीर को बीमारियों से दूर रखते हैं। इस बात को साइंटिस्ट भी रिसर्च कर चुके हैं कि मिट्टी के बर्तन बेहद गुणकारी है। आयुर्वेद के अनुसार भी माना गया है कि मिट्टी के बर्तनों में खाना पोस्टिक व स्वादिष्ट बनता है। इसे धीरे-धीरे पकाना चाहिए। इन बर्तनों में खाना बनने में समय लगता है, लेकिन खाना सेहत के लिए फायदेमंद होता है।

2. लोहे के बर्तन-

लोहे यानी Iron के बर्तन देखने व उठाने में भारी होते हैं, महंगे और आसानी से ना घिसने वाले यह बर्तन खाना बनाने के लिए अच्छे माने जाते हैं। जिसमें खाना बनाने से भोजन में आयरन जैसे पोषक तत्व बढ़ जाते हैं और हमारे शरीर के लिए फायदेमंद होते हैं

3. तांबे के बर्तन-

तांबे के बर्तन का इस्तेमाल पुरातन समय में अधिकतर किया जाता था। तांबे के बर्तन में रखें पानी का सेवन करने से व्यक्ति रोग मुक्त बनता है। यह पानी हमारे रक्त को शुद्ध करता है, इससे स्मरण शक्ति बढ़ती है। लीवर संबंधी समस्याएं भी दूर होती है। यह पानी शरीर के लिए जहरीले तत्व को खत्म करता है। जो हमारे शरीर में बढ़ते मोटापे मोटापे को कम करने में सहायक है।

नोट- तांबे के बर्तन में दूध का सेवन नहीं करना चाहिए।

4. स्टील-

स्टील के बर्तन हम सभी के घरों में आमतौर पर इस्तेमाल किए जाते हैं। आजकल बाजारों में बर्तनों के नाम पर सबसे ज्यादा स्टील पाया जाता है। स्टील के बर्तन नुकसानदायक नहीं होते। यह ना तो गर्म से कोई प्रतिक्रिया करते हैं और ना ही ठंडे से। इनमें खाना खाने से ना तो कोई फायदा होता है और ना ही कोई नुकसान होता है।

Source of Inspiration -

इस सबके प्रेरणादायक संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां है। जिनकी प्रेरणा से आज करोड़ों लोग नॉनस्टिक व एलुमिनियम के बर्तनों को त्यागने का प्रण ले चुके हैं और इसकी जगह मिट्टी, लोहे व स्टील के बर्तनों का इस्तेमाल करते हैं। वह स्वयं तो इन बर्तनों का त्याग कर चुके हैं और साथ में दूसरों को भी इन्हें छोड़ने के लिए जागरूक करते हैं।

Conclusion-

आइए हम सभी मिलकर अपनी पारंपरिक वस्तुओं जैसे कि मिट्टी, लोहे, पीतल, तांबे व स्टील के बर्तनों को बढ़ावा दें और आधुनिक एलुमिनियम बर्तनों को इस्तेमाल ना करने का प्रण लें।

Image for post
Image for post

ReplyForward

Get the Medium app

A button that says 'Download on the App Store', and if clicked it will lead you to the iOS App store
A button that says 'Get it on, Google Play', and if clicked it will lead you to the Google Play store