Giving the gift of home to homeless

आज के समय हर इंसान का यह अरमान होता है कि उसका एक प्यारा सा सपनो का घर हो, वह घर जो उसे हर सरदी-गर्मी से बचाए, हर मुसीबत से सुरक्षित रखे। जो घर उसका अपना हो और वो उसमें अपने परिवार के साथ से रह सके। लेकिन हमारे देश में ऐसे अनगिनत परिवार है जिनके सिर पर रहने छत तक नहीं है। जिन्हे सर्दी में ठंड, गर्मी में तपती लू, बारिश व आंधी, तूफान आदि मे समय व्यतित करना पड़ता है। कई बार इन बेघर लोगो की मौसम की मार से जान भी चली जाती है।

बेघर होना बनता है कई रोगों का कारण-

भगवान की बनाई इस धरती पर जीने के लिए हर इंसान को तीन वस्तुओं की जरुरत पड़ती है और वो है खाने के लिए रोटी, पहनने के लिए कपडा़ और रहने के लिए घर। अगर इन तीन जरुरतों मे से इंसान के जीवन में किसी एक की भी कमी होती है तो इस धरती पर जीवन जीना कठिन हो जाता है। इनमें से हम आज बात कर रहे है रहने के लिए आशियाना। अगर इंसान पर रहने के लिए घर और सिर पर छत न हो तो यह इंसान के जीवन में आने वाली कई बीमारियों और बाधाओं का कारण बनता है। घर न होने के कारण मौसम से जुड़ी बीमारियों जैसे सर्दी-जुकाम, बुखार व स्किन एलर्जी से बचना मुश्किल होता है। यही नहीं और भी जानलेवा बीमारियां एक बेघर मनुष्य के जीवन मे आती रहती हैं। जैसे कुपोषण, डेंगू, मलेरिया, हैजा आदि। इन शारीरिक रोगों के साथ-साथ कई बार इंसान मानसिक रोगी भी बन जाता है और मानसिक तनाव, पागलपन व नशे की लत का शिकार हो जाता है।

भारत में लगभग 18 लाख लोग बेघर-

एक सर्वे के अनुसार पता लगाया गया की हमारे भारत देश में लगभग 18 लाख लोग ऐसे है, जिनके पास अपना सपनो का घर नहीं है। जिन्हें गर्मी-सर्दी हर मौसम में सड़क के किनारे फुटपाथ पर सोना पड़ता है और मौसम की मार पड़ने पर कई लोगो को अपनी जान गवानी पड़ती है।

बेघर, अपंगहीन, लाचार व बेसहारा लोगों के लिए आशा की किरण बनी 'आशियाना'-

देश में गरीबी, भुखमरी व बेरोजगारी के चलते अनेकों लोगों के लिए अपना खुद का घर बनाना आज के समय मे नामुमकिन हो गया है। इसके साथ ही कुछ बेसहारा बच्चे अथवा महिलाएं जिनके परिवार से मुखिया का साया उठ चुका है। उनके लिए घर का सपना देखना भी असंभव होता है।
इसी असंभव को संभव बनाने के लिए हमारे समाज में एक संस्था द्वारा बहुत ही अनोखी मुहिम चलाई गई है। जिसका नाम है 'आशियाना'। जी हां, आशियाना यानी Homely Shelter नामक इस मुहिम के तहत करोड़ों लोग अपने संसाधनों व पैसे का उपयोग कर ऐसे बेसहारा व बेघर लोगों को घर बना कर देते हैं। वो भी उनसे एक पैसा लिए बिना आपको शायद सुनकर हैरानी हो रही होगी?
लेकिन यह सत्य है। आइए विस्तार से जानते हैं कि आखिर वह कौन सी संस्था है और इस मुहिम का क्या मकसद है-

करोड़ों लोगों ने ठानी बेसहारा लोगो को सहारा देने की-

हरियाणा राज्य के सिरसा जिले में स्थित डेरा सच्चा सौदा नामक संस्था के करोड़ों अनुयायी अपने spiritual master व mentor की पावन शिक्षा पर चल कर ऐसे कदम उठा रहें हैं। जिनका वर्णन आसानी से नहीं किया जा सकता। डेरा प्रमुख संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिहं जी इन्सां की देख-रेख में चलाए गए 134 समाज हित के कार्यों को ये डेरा सच्चा सौदा के अनुयायी बड़ी ही निष्ठा से निभा रहे हैं।
इसी कड़ी में एक मानवता भलाई का कार्य है 'आशियाना' मुहिम, जिसके तहत डेरा श्रद्धालुओं द्वारा बेघर, बेसहारा व गरीब लोगों को मकान बना कर दिए जाते हैं और इस निमार्ण कार्य का सारा ख़र्चा डेरा अनुयायी अपने आप उठाते हैं।

अब तक हजारों लोगों के सिर पर छत देने मे सफल हो रही आशियाना मुहिम-

आशियाना मुहिम के चलते अब तक डेरा अनुयायियों द्वारा लाखों लोगों को मकान बनाकर दिए जा चुके हैं। डेरा सच्चा सौदा के अनुयायी इसके लिए पूर्ण रूप से ख़र्चा अपनी तरफ से उठाते हैं।
डेरा सच्चा सौदा में होने वाले सत्संग में हर बार न जाने कितने परिवारों को उनके नवनिर्मित मकान की चाबी सौंपी जाती है। इस महान कार्य का सारा श्रेय डेरा सच्चा सौदा के अनुयायी अपने पूज्य गुरु संत डॉ गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां को देते हैं। जिन्होंने उन्हें ऐसे इंसानियत के मार्ग पर चलने की शिक्षा दी।

एक ही दिन मे बेघरों के सपनों को साकार करती 'आशियाना' मुहिम-

जब आशियाना मुहिम के विषय में डेरा सच्चा सौदा के अनुयायियों से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि किसी भी बेसहारा को मकान बना कर देना उनके लिए एक गर्व की बात है और इसके लिए सभी संसाधन वे लोग अपनी तरफ से ही जुटाते हैं।
यही नहीं डेरा प्रेमी इन मकानों को केवल एक दिन में ही बनाकर तैयार कर देते हैं। अपने पूज्य गुरुजी द्वारा बताई गई पावन शिक्षा को अपनाकर अपनी तीव्रगामी कार्यक्षमता से डेरा श्रद्धालु अनेकों मकान कुछ ही दिनों व एक-दो मकान तो एक ही दिन में बनाकर तैयार कर देते हैं।

2001 में भूकंप के दौरान हुए बेघर लोगों को इन डेरा श्रद्धालुओं व Baba Ram Rahim जी द्वारा बनाकर दिए गए घर-

पूज्य गुरु संत डॉक्टर गुरमीत राम रहिम सिहं जी इन्सां के दिशा निर्देशन में डेरा अनुयायियों द्वारा गुजरात जैसे क्षेत्र में आए भूकंप व दार्जिलिंग शहर में लगी आग के समय भी हज़ारों लोगों की जान बचाई गयी व उनके उजड़े घर फिर से बसाए गए।
2001 में आये गुजरात के भूकंप में डेरा सच्चा सौदा के सेवादार सरकार की अनुमति से राहत कार्य लेकर वहां पहुंचे व कुछ ही दिनों में उन्होंने एक पूरे गांव का नवनिर्माण किया। इस गांव का नाम प्रतापगढ़ रखा गया।
यही नहीं ऐसे आपदा के समय में डेरा की शाह सतनाम जी ग्रीन S वेलफेयर फोर्स विंग के सेवादारों द्वारा
- 104 लकड़ी के घरों का निर्माण केवल 3 दिन में किया गया।
- इन सेवादारों द्वारा जलापूर्ति के लिए वहां 2 km लम्बी पाइपलाइन भी बिछाई गई।
- विधवा व गर्भवती बेसहारा महिलाओं को 60 नए घर बनाकर दिए।

लाखों बेघर लोग आज भी करते हैं आभार व्यक्त-

डेरा सच्चा सौदा के अनुयायियों द्वारा अपने पूज्य गुरुजी की शिक्षा के अनुसार उठाए इस प्रसंशनीय कदम से आज लाखों लोगों की जिंदगी आबाद हुई है। वे सभी लोग इसके लिए पूज्य गुरुजी और डेरा के सेवादारों का तहदिल से शुक्रिया करते हैं। उनका कहना है कि यदि गुरुजी व उनके सेवादार न होते तो हम लोग सारी जिंदगी यूं ही फुटपाथ पर बिना घर के गुज़ार देते। लेकिन गुरुजी ने हमारे बारे मे सोचा व हमें घर देकर हमारी ज़िंदगी को खुशहाल बनाया।

इस अनूठे कदम के पीछे प्रेरणा-

जहां इस मतलबी दुनिया में कोई अपने स्वार्थ के बिना किसी को एक रुपया भी दे कर खुश नहीं होता, वहीं करोड़ों लोगों के दिल में इस ज़ज्बा भरना कि वे किसी बेसहारा को अपने खर्चे पर पूरा घर बनाकर दें, यह किसी आम आदमी के बस की बात नहीं है। जी हां, ये जितने भी डेरा अनुयायियों द्वारा मानवता भलाई के कार्य किए जाते हैं। इनके पीछे केवल एक ही प्रेरणास्रोत है और वो हैं इन करोड़ों लोगों के गुरु सन्त डॉ गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां जिन्होने द्वारा अब तक ऐसे 134 समाजिक कार्य शुरू कर चुके हैं। जिनके बारे में कोई नहीं सोच सकता और ये आशियाना मुहिम भी उसी का एक हिस्सा है। यही नहीं गुरुजी ने हमेशा अपने सत्संग में अपने करोड़ों अनुयायियों को सिखाया है कि बेसहारा लोगों का सहारा बनें। उन्हें जितना हो सके उतना मदद करें व उनकी ज़िंदगी को भी आबाद करने में सहयोग करें।

Conclusion-

दोस्तों अपने लिए तो हर कोई जीता है, पैसा खर्च करता है। किंतु फायदा तब है जब हमारी वजह से एक भी इंसान के चेहरे पर खुशी होती है। जब हमारे खर्च किए गए पैसे से किसी की ज़िंदगी सँवरती है। हम और आप भले ही किसी के लिए लाखों न खर्च कर सकें किन्तु डेरा अनुयायियों से प्रेरणा लेकर कुछ हिस्सा तो ऐसे जरूरतमंद व बेहसरा लोगों को लिए खर्च कर ही सकते हैं, जिस से उन्हें भी अपने हिस्से की छत मिल जाए।

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