Disaster relief operations by humanity warriors

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प्रकृति ईश्वर के द्वारा बनाई गई सुंदर रचनाओं में से एक है। जिसमें ईश्वर ने विभिन्न प्रकार की वस्तुओं को संजोकर रखा है। सुंदर जंगल, झरने, झीले, फल-फूल, सूक्ष्म जीव-जंतु, सुंदर बर्फ की पहाड़ियां आदि प्रकृति ने हमें सुंदर उपहार दिए हैं। जो हर इंसान को अपनी तरफ आकर्षित करते हैं। प्रकृति के इस रूप को हर कोई पसंद करता है। लेकिन आपको बता दें प्रकृति का दूसरा रूप बहुत ही भयावह है, जो दुनिया को विनाश की तरफ ले जाता है। जो पहाड़ों को मिलाकर, जमीन को हिलाकर फसलों व घरों में पानी भरकर बाढ़ का भयंकर रूप लेकर हर साल लाखों लोगों के जीवन में कहर ढा़ता है।

Natural Disasters-

प्रकृति में हो रहे दिन-प्रतिदिन बदलाव के कारण विभिन्न प्रकार की आपदाएं घटित होती है। जैसे- बाढ़ आना, सूखा पड़ना, भूकंप आना, सुनामी, चक्रवात आदि। इन आपदाओं को प्राकृतिक आपदा कहा जाता है। जो धरती पर रह रहे हर जीव को प्रभावित करती है। यह आपदाएं प्राकृतिक भी हो सकती है व मानव निर्मित भी हो सकती है। दिन-प्रतिदिन बढ़ते औद्योगीकरण और प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन व पेड़ों की कटाई के कारण यह प्राकृतिक आपदाएं घटित होती है। जो मानव जाति पर गहरा प्रभाव डालती है।

Impact of natural disasters on human and animals life-

प्राकृतिक आपदा एक अप्रत्याशित घटना है, जो धरती पर उपस्थित हर जीव के जीवन को बुरी तरह से प्रभावित करती है। भूकंप, सुनामी आदि आपदाएं प्रकृति का वह भयावह रूप है जो मनुष्य को विनाश की तरफ ले जाती है। जहां पर भी प्राकृतिक व मानव निर्मित आपदाएं आती है, वहां पर पेड़-पौधों, जानवरों मानव जाति के जीवन को गहरी क्षति पहुंचती है। प्राकृतिक आपदाएं आने पर कुछ ही समय में सैकड़ों घर-परिवार नष्ट हो जाते हैं। इन आपदाओं का इंसान पेड़-पौधों व जानवरों पर बहुत गहरा व बुरा प्रभाव पड़ता है। जो बहुत सी जिंदगीयों को समाप्त कर देता है।

Humanity warriors set example by doing field rescue operation-

आपदा ग्रस्त क्षेत्रों में फंसे लोगों की जान बचाने के लिए प्रशिक्षित लोगों की आवश्यकता होती है। घायल व जख्मी लोगों को ठीक करने, उनका दुःख दूर करने व उन्हें सांत्वना देने की आवश्यकता होती है। ऐसे समय में पीड़ित लोगों को राहत प्रदान करना मानवता का एक नेक कार्य है।

आपको बता दें डेरा सच्चा सौदा संस्था ने इन आपदाओं व पीड़ित लोगों के बारे में सोचा व डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने एक ऐसी फौज बनाई जो हर संकट में लोगों को राहत पहुंचाती है। इस फौज का नाम पूज्य गुरु जी ने ‘Shah Satnam Ji green S welfare force wing’ दिया है। जो निःस्वार्थ भाव से लोगों की मदद करती है। एक लाख से अधिक संख्या का यह संगठन जिसमें पढ़े-लिखे नौजवान डॉक्टर, इंजीनियर आदि शामिल है। जो बिना किसी पैसे के लोगों की निःस्वार्थ भाव से सेवा करते हैं। आपदा प्रबंधन के लिए ग्रीन एस वेलफेयर फोर्स विंग के सेवादारों को वार्षिक प्रशिक्षण भी दिया जाता है। आइए जानते हैं कुछ उदाहरण जो इस प्रकार है-

  • Earthquake in Nepal-

जनहित कार्यों में शाह सतनाम जी ग्रीन एस वेलफेयर फोर्स विंग एक अद्भुत इतिहास को समेटे हुए है। वर्ष 2015, मई में जब नेपाल के नवाकोट जिले में Richard scale पर 7.8 की भारी तीव्रता से भूकंप आया था तब डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने स्वयं वहां पहुंचकर पीड़ित लोगों की मदद का हाथ बढ़ाया था। पूज्य गुरुजी ने घर-घर जाकर पीड़ितों के दुःख को समझा व उन्हें सांत्वना दी। डेरा सच्चा सौदा के सेवादारों ने नेपाल के नावाकोट जिले के गांवों का पुनर्निर्माण किया, उन्हें राहत सामग्री मुहैया कराई व घायल और जख्मी लोगों को उपचार प्रदान किया।

  • Tsunami in Andaman and Nicobar islands-

हर विपदा में पीड़ितों को बचाने के लिए डेरा सच्चा सौदा के सेवादार जल्द से जल्द आपदा से प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचते हैं व पीड़ितों के साथ रक्त संबंध ना होने पर भी इंसानियत को अपना पहला धर्म मान कर लोगों की मदद करते हैं। आपको बता दें 26 दिसंबर 2004 को एक विनाशकारी सुनामी ने पूरे दक्षिण एशिया (अंडमान व निकोबार) को हिला कर रख दिया था। इस आपदा में जान व माल की भारी क्षति हुई थी। पूज्य गुरु जी के दिशा निर्देश व पावन रहनुमाई से प्रशिक्षित सेवादारों की टीमों को सुनामी से प्रभावित क्षेत्र में भेजा गया था। डेरा सच्चा सौदा के अनुयायियों ने वहां राहत सामग्री मुहैया कराई व लोगों को अपने जीवन के पुनर्निर्माण में सहायता की। कुछ क्षेत्रों में आफ्टरशाॅक्स लगातार चल रहे थे और समुद्र में नौकाओं का उपयोग कर लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाना बहुत बड़ी चुनौती था। थोड़ी सी लापरवाही दुर्घटना का कारण बन सकती थी। लेकिन निर्भयता और अत्यधिक समर्पण में उनके लक्ष्य को सफल बनाया। जहां भारतीय सेना के कुछ ही जवान थे, वहीं डेरा सच्चा सौदा के अनुयायियों की सारी टीम 55 दिन तक उस द्वीप पर ही रही थी।

  • Cyclone in Orissa-

आपको बता दें, वर्ष 1999 में उड़ीसा राज्य के कई इलाकों में बड़े पैमाने पर चक्रवात की चपेट में आ गए थे। उस आपदा के दौरान डेरा सच्चा सौदा के अनुयायी पूज्य गुरु संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की पावन प्रेरणा से एक विशेष ट्रेन के माध्यम से 26,000 क्विंटल भोजन और अन्य राहत सामग्री लेकर सिरसा से उड़ीसा की ओर रवाना हुए थे। डेरा सच्चा सौदा के सैकड़ों अनुयायियों ने राशन के साथ उड़ीसा की यात्रा की और घर-घर जाकर राशन वितरित किया। इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित किया कि हर व्यक्ति के पास पर्याप्त भोजन और आवश्यक सामग्री है।

  • Drought in Rajasthan-

आपको बता दें, अप्रैल 2001 में राजस्थान में सूखा पड़ने पर डेरा सच्चा सौदा सौदा संस्था द्वारा टैंकरों का उपयोग करके उदयपुर, चूरू और बाड़मेर जिलों के सूखा प्रभावित क्षेत्रों में पानी की आपूर्ति की। डेरा सच्चा सौदा के अनुयायियों ने पूज्य गुरु संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह जी की पावन प्रेरणा से 1,500 क्विंटल पशुओं के चारे, 30,000 क्विंटल गेहूं, लगभग 500 क्विंटल मकई के बीज और कपड़ों से भरे 100 ट्रकों और अन्य आवश्यकताओं के सामान को गांव के लोगों तक पहुंचाया।

  • Fire in Darjeeling-

अप्रैल 2012 में, डेरा सच्चा सौदा के अनुयायियों ने दार्जिलिंग शहर को जलाने से रोका, जब कुछ दुकानों और होटलों में भीषण आग लगने लगी। उनके बहादुर व नेक कार्यों ने पूरे शहर को बड़े पैमाने पर विश्व विनाश होने से बचाया। सिलेंडर ब्लास्ट से आग लगी और इससे बड़ा नुकसान हो सकता था। लेकिन अनिश्चितकालीन योद्धाओं ने शहर को बचाने के लिए सुबह 2 बजे से ही विस्फोट की लड़ाई लड़ी थी।

Source of inspiration for Millions-

करोड़ों लोगों में मानवता भलाई के कार्यों का जज्बा भरने का सारा श्रैय डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख संत डॉक्टर गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां को जाता है। जिनका एकमात्र उद्देश्य मानवता की सेवा करना है। पूज्य गुरु जी अपने अनुयायियों को भी इसके लिए प्रेरित करते है। पूज्य गुरु जी की पावन प्रेरणा से डेरा सच्चा सौदा द्वारा केवल आपदा प्रबंधन ही नहीं बल्कि, 134 मानवता भलाई के कार्य में योगदान दिया जाता है। जिनमें वृक्षारोपण, रक्तदान करना, अपने आस-पास स्वच्छता अभियान चलाना आदि शामिल है। पूज्य गुरू जी की प्रेरणा से डेरा सच्चा सौदा के आनुयायी जहां भी कोई भी प्राकृतिक आपदा आती है, वहां पर राहत मुहैया कराने के लिए पहुंच जाते हैं।

Conclusion-

भारत देश के नागरिक होने के नाते हम सभी का कर्तव्य बनता है कि जहां कहीं भी प्राकृतिक आपदा आती है, हमें वहां पर दूसरों की मदद के लिए तत्पर रहना चाहिए, जिससे वहां पर फंसे लोगों की मदद की जा सके।

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