खुशहाल दाम्पत्य के लिए जरूरी है एकल संतान

ज़िन्दगी हमेशा हमारे लिए चुनौतियों से भरी होती है जहां हमें कई ऐसे निर्णय लेने पड़ते हैं जो हमारे साथ ाथ हमारे परिवार और आने वाली पीढ़ी के लिए भी सही साबित हों। ऐसा ही कुछ निर्णय तब आपके सामने आता है जब आप मां या पिता बनकर एक परिवार का निर्माण करते हैं। एक अभिभावक के रूप में आपकी सबसे बड़ी चुनौती होती है अपने बच्चे को एक अच्छी व खुशहाल ज़िन्दगी देना। ऐसे कदम पर जरूरत है कि आप अपने विवेक से काम लें व ये तय करें कि आप अपने बच्चे को किस प्रकार का भविष्य देना चाहते हैं।

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Parenting के मामले में जहां कुछ लोग अभी भी पुरानी व रूढ़िवादी विचारधाराओं से जुड़े हैं। वहीं कुछ समझदार लोग अपने life partner और बच्चे के लिए आधुनिक सोच के साथ चलते हैं और ये ख्याल रखते हैं कि Parenting का उनके दापंत्य जीवन पर विपरीत असर न पड़े।

समाज की आलोचना से डर कर निर्णय लेना:

यदि आप माता या पिता बनने वाले हैं, तो ये आवश्यक हैं कि आप अपनी समझ से काम लें न कि समाज की तरफ से आने वाली आलोचना से डरें। आज के समय में समाज को और बेहतर बनाने के लिए ये बहुत जरूरी है कि आप एक ही बच्चे की परवरिश अच्छे व सही ढंग से करें। यदि आप पहले से एक बच्चे के अभिभावक हैं, तो यह निर्णय सोच समझ कर लें कि आपको दूसरा बच्चा चाहिए या नहीं। क्योंकि इस से आपकी गृहस्थी भी प्रभावित होती है।

एक से अधिक संतान है population explosion का मुख्य कारण:

Population explosion यानी जनसंख्या वृद्धि आज हमारे देश की एक गम्भीर समस्या है और इसका मुख्य कारण है एक से अधिक संतान पैदा करना। हमारे देश का अशिक्षित वर्ग जानकारी व जागरूकता के अभाव में एक से अधिक संतान पैदा कर जनसख्यां वृद्धि को बढ़ावा दे रहा है। यही नहीं इस से हमारे समाज मे और कई समस्याएं भी जन्म लेती हैं जैसे कि भुखमरी, बेरोजगारी व कई जानलेवा बीमारियां भी इसी जनसख्यां वृद्धि का परिणाम हैं।

न करें लड़का-लड़की में फ़र्क़:

हमारी पुरानी विचारधाओं के चलते, अक्सर लोग बेटा पैदा करने के चक्कर में बहुत सी बेटियों को जन्म दे देते थे और फिर उन सब का पालन-पोषण करना उनके लिए एक बड़ी समस्या बन जाता था। किंतु ऐसा रूढ़िवादी विचार रखना कि बेटा ही वंश को आगे बढ़ा सकता है, पूर्णतया गलत है। आज के समाज में बेटियाँ भी बेटों से कम नहीं हैं। आज हर field में लड़कियां भी लड़कों के कंधे से कंधा मिलाकर समाज के विकास में अपना योगदान दे रही हैं। ऐसे में जरूरी है कि अभिभावक ये समझें कि यदि उनके पास एक बेटा या बेटी जो भी है, उसे ही अच्छे संस्कार दें व उसे एक अच्छा नेक इंसान बनाएं।

Benefits of Only One Child:

यदि आपके पास एक ही संतान हैं तो इस पर चिंता न करें। आपके लिए यह एक अच्छी बात है कि आप अपने बच्चे के साथ ज्यादा से ज़्यादा वक्त बिता सकते हैं। आप उसके विकास पर पूर्ण रूप से ध्यान दे सकते हैं और तो और यदि आप कामकाजी महिला हैं, तो ऐसे में आपको अपनी इकलौती संतान और गृहस्थ जीवन को संभालना आसान हो जाता है। आज कल के इस महंगाई भरे जीवन में बच्चों की शिक्षा से लेकर उनके रहन-सहन में जो खर्चा आता है, उसे पूरा करना एक सामान्य दम्पति के लिए आसान नहीं है। ऐसे में यदि आप एक ही संतान के अभिभावक हैं, तो ये स्थिति आपके लिए थोड़ी आरामदेह हो सकती है।

एक संत का आह्वान बेटियों के लिए:

सिरसा जिले में स्थित डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख सन्त डॉ गुरमीत राम रहीम जी इन्सां अपने सत्संगों में करोड़ों लोगों से यह आह्वान करते हैं कि वो एक ही सन्तान को जन्म दें और बेटे की इच्छा में बेटी को गर्भ में न मारें। बेटा हो या बेटी उसे समान रूप से अधिकार है जीने का। गुरुजी कहते हैं कि यदि आप बेटी का पालन पोषण नहीं कर सकते, तो उसे मारिये मत बल्कि उसे डेरा सच्चा सौदा में हमारे पास छोड़ जाइए। हम उस बेटी को पिता बनकर पालेंगे व उसे उच्च शिक्षा दिलाई जाएगी। गुरुजी की शिक्षा के अनुसार डेरा सच्चा सौदा में ऐसी करीब 25 बच्चियां हैं। जिन्हें उनके माँ बाप ने मरने के लिए छोड़ दिया था। उन बच्चियों की देखभाल डेरा सच्चा सौदा में गुरुजी द्वारा ही की गयी व आज उनमें से बहुत सी बेटियां पढ़ाई में अव्वल आती हैं और कुछ बेटियां games में national और international level की champion भी हैं।

Content with One Initiative:

संत डॉ गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने जनसख्यां वृद्धि को कंट्रोल करने के लिए एक नई मुहिम चलाई है। जिसे पूज्य गुरु जी ने नारा दिया है- “बच्चा एक ही काफ़ी, वरना दो के बाद माफ़ी”। गुरुजी के इस आह्वान पर लाखों लोगों ने ये प्रण लिया है कि वे केवल एक ही संतान पैदा करेंगे। इस से वो population control में भी अपना योगदान दे सकेंगे व साथ ही उस बच्चे को भी एक अच्छा पारिवारिक वातावरण प्रदान कर सकेंगे।

अब बेटियों से भी बढ़ेगा वंश:

जो लोग इस उलझन में रहते हैं कि उनके घर में बेटे ने जन्म नहीं लिया और बेटी की शादी के बाद उनका वंश कैसे बढ़ेगा। तो ऐसे अभिभावकों को अब चिंता करने की जरूरत नहीं है।

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पूज्य गुरु सन्त डॉ गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने बेटियों के हित में एक ऐसी अनोखी मुहिम चलाई है। जिसके बारे में कोई सोच भी नहीं सकता। जी हां, डेरा सच्चा सौदा की इस पहल के तहत अगर किसी दम्पति के पास सिर्फ़ एक बेटी है। तो उनकी बेटी शादी के बाद लड़के को अपने घर विदा करवाकर ले जाती है। इस अनोखी रीत का पूज्य गुरु संत डॉ गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने ‘कुल का क्राऊन’ दिया है। आप को शायद सुनने में यह बात अजीब लग रही होगी?

किन्तु ये एक सत्य है। डेरा सच्चा सौदा में अब तक कई ऐसी शादियां हो चुकी हैं। जहाँ एक बेटी बारात लेकर आती है व शादी करवा कर दूल्हे को घर ले जाती है। ऐसी अनोखी मुहिम के कारण अब बहुत से लड़कियों के माता-पिता ने ये चिंता करना छोड़ दिया है कि अब उनका वंश कैसे चलेगा।

Give your contribution to make the society better:

पूज्य गुरु संत डॉ गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां के एक आह्वान से जैसे लाखों लोगों ने Content With One मुहिम को अपनाया व जनसंख्या नियंत्रण में अपना योगदान दिया। ऐसे ही समाज के नागरिक होने के नाते हम सभी का ये फ़र्ज़ बनता है कि समाज के विकास में अपना योगदान दें। इसके लिए जरूरी है, हम इस बात को समझे कि एक या दो सन्तान पैदा करना ही एक परिवार, माता-पिता, बच्चे और समाज के लिए कल्याणकारी कदम है।

निष्कर्ष:

इन सभी विचारों को आप से सांझा करने का हमारा मक़सद है कि हम सभी मिलकर अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बेहतर कल का निर्माण करें। बच्चों को अच्छा भविष्य दें, न कि उनके आज को अंधेरे में धकेल दें। इसलिए हम सभी का ये कर्तव्य है कि अपनी एक सन्तान को ही उच्च विचार व अच्छे संस्कार दें। इस बारे में और लोगों को भी जागरूक करें।

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