Birds Nurturing- Serve the little creatures of God

Serve birds, Save nature. Feed birds to save nature

पक्षियों को निहारना और उनकी मधुर आवाज सुनना हर किसी को अच्छा लगता है। जब ये रंग-बिरंगे पक्षी नीले गगन में अपने छोटे-छोटे पंखों से उड़ान भरते हैं, तो ऐसा लगता है मानो नीला आसमान भी इनके साथ साथ खुशी से झूम रहा हो। परंतु आजकल बदलते जमाने के साथ ये रंग-बिरंगे पक्षी पर्यावरण से लुप्त होते नजर आ रहे हैं।

ईश्वर की दी हुई अनमोल नियामत है- पक्षी

पक्षी ईश्वर की दी हुई अनमोल दात होते हैं। जिनको निहारने से दिनभर की थकान दूर हो जाती हैं और मन को एक असीम शांति मिलती है। पक्षी हमें हमारे दिन भर की भागदौड़ वाली जिंदगी से कुछ पल के लिए दूर कर देते है। जो हमारे तनाव को दूर करने में सहायक है।

पुराने समय से ही हमारी संस्कृति रही है, पक्षियों को दाना डालना:

हमारी संस्कृति समस्त संसार में शुरू से ही महान रही है। पुराने समय से ही हमारे बुजुर्ग जब भी खाना खाते थे, तो उसका पहला निवाला निकालते थे। जिसे सूक्ष्म जीव जैसे चिंटियां, चिड़िया आदि पक्षी खा लेते थे। इससे उन जीवो की भूख भी मिटती थी और भगवान भी खुश होते थे। लेकिन जैसे-जैसे समय बदल रहा है, लोग अपनी संस्कृति को भूल रहे हैं। परंतु आज समय है अपनी भारतीय संस्कृति को अपनाने का। हमें पक्षियों पर रोजाना दाना व पानी अवश्य डालना चाहिए।

बच्चों में भी डाले पक्षियों पर दाना डालने की आदत:

बच्चे छोटे पौधे की तरह होते हैं। हम उन्हें जैसा आकार देते हैं यानी जैसे संस्कार देते हैं, वह उसे अपने जीवन में अपनाते हैं। तो ऐसे में हमें छोटे बच्चों में बचपन से ही पक्षियों को दाना डालने में पानी रखने की आदत सिखानी चाहिए।

पर्यावरण के दुष्परिणामों का पक्षियों पर प्रभाव -

पर्यावरण को संतुलित रखने में पेड़-पौधों के साथ-साथ पशु-पक्षियों की महत्वपूर्ण भूमिका हैं। लेकिन मनुष्य के अत्यधिक हस्तक्षेप के कारण पर्यावरण पर बुरा प्रभाव पड़ता है। हमें इस दिशा में कदम उठाने की आवश्यकता है। हमें प्रकृति के साथ ना तो छेड़छाड़ करनी चाहिए और न ही किसी को करने देनी चाहिए।

मनुष्य अपने स्वार्थ के लिए प्रकृति के साथ दिन प्रतिदिन लगातार छेड़छाड़ करता जा रहा है। इसके दुष्परिणाम भी दिखाई दे रहे हैं।

Eco System का महत्वपूर्ण घटक पेड़-पौधे है। पेड़-पौधों की दिन प्रतिदिन कटाई के कारण पेड़ पौधों की संख्या कम होने से पक्षियों को घोंसला बनाने के लिए उचित जगह नहीं मिल पा रही है।

अधिक मात्रा में हरियाली होने के कारण पक्षियों को पानी की जरूरत भी कम पड़ती है। लेकिन पेड़-पौधों की कटाई से हरियाली में कमी आ रही है, जिसके कारण बहुत से पक्षियों को अपनी जान गवानी पड़ती है।

क्या आपको पता हैं इन पक्षियों के लुप्त होने का कारण क्या हैं ?

आपको बता दें इनके लुप्त होने का एक कारण कहीं ना कहीं ‘इंसान’ ही है। क्योंकि आजकल की इस भागदौड़ भरी जिंदगी में हम इतना व्यस्त रहते हैं कि हम ईश्वर की और किसी भी कृति के बारे में सोच नहीं पाते। प्रत्येक वर्ष ना जाने कितने पशु-पक्षी भूख व प्यास के कारण अपनी जान गवाँ देते हैं। इस संसार में इंसानियत भी खत्म होती जा रही है। कुछ लोग अपने जीभा के स्वाद के लिए पक्षियों की हत्या कर देते हैं। जिस से पक्षियों की संख्या में कमी आ रही है।

वह संस्था जिसने इन बेज़बान पक्षियों के बारे में सोचा:

आपको बता दें सिरसा जिले में स्थित एक ऐसी संस्था है, जिसने कुदरत की दी हुई अनमोल नियामत बेज़बान पक्षियों के बारे में सोचा है। इस संस्था के एक प्रयास से आज करोड़ो लोग अपने दिन की शुरुआत नन्हे-मुन्ने पक्षियों की चहचाहट से ही शुरू करते हैं। सुबह होते ही अपने घर की छतों पर या बाग-बगीचों में इन पक्षियों के लिए दाने-पानी का प्रबंध करते हैं ताकि हमारी तरह ये पक्षी भी अपना जीवन सुखमय व्यतीत कर सके।

केवल इतना ही नहीं ये करोड़ो लोग अपने भोजन का पहला निवाला भी पक्षियों के लिए निकालते है, जिस से ये लोग अपने साथ-साथ उन बेजुबान पक्षियों की भी भूख कम कर सके।

पक्षियों के लिए खादय साम्रगी:

हमें यह भी जानना अति आवश्यक है कि सर्दियों के मौसम में पक्षियों को चोगे में क्या डालना

चाहिए। सर्दियों में पक्षियों को गर्म रहने के लिए ज्यादा कैलरीज़ बर्न करने की जरूरत होती है।

जैसे -

Peanuts (मूगफली)

Nyger seed (काले तिल)

Fruit(फल)

Millet (बाजरा )

Black Oil Sun Flower Seed(सूरजमुखी के बीज)

ये सभी चीजें पक्षियों की सेहत के लिए फायदेमंद है। इसमें भरपूर मात्रा में vitamin और minerals पाए जाते हैं।

नोट- बाजरा केवल सर्दियों में ही देना चाहिए। गर्मियों में इसका प्रयोग ना करें तो अच्छा है। गर्मियों में बाजरा खाने से पक्षियों को देखने और सुनने संबंधी समस्याएं हो सकती है।

पक्षियों के लिए खाने की व्यवस्था करना

डेरा सच्चा सौदा संस्था द्वारा 134 मानवता भलाई के कार्य किए जाते हैं। जिनमें से एक कार्य पक्षियों के लिए दाना पानी की व्यवस्था करना है। अपने गुरु जी की पावन प्रेरणा से लाखों डेरा अनुयायी अपने घर की छतो पर, अपने आस-पास की जगहों पर पक्षियों के लिए दाने-पानी की व्यवस्था करते हैं। ऐसा करके ये डेरा अनुयायी लाखों पक्षियों की जान बचाने में अपना सहयोग देते हैं।

प्रेरणास्त्रोत:

अब आप यह भी जानना चाहेंगे कि इन करोड़ो लोगों को बेजुबान पशु-पक्षियों की देखभाल करने की प्रेरणा मिलती कहां से है, तो आपको बता दें इनके प्रेरणास्रोत डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख संत डाॅ गुरमीत राम रहीम जी इन्सां है। जिनकी पावन शिक्षा से डेरा सच्चा सौदा के लाखों अनुयायी आज भी इन बेजुबान पक्षियों की देखभाल अपने बच्चों की तरह कर रहे हैं। उन्होने ऐसे 134 मानवता भलाई के नेक कार्य चलाए हुए है। जिनमें से एक कार्य Birds Nurturing है। हमें बहुत खुशी है कि गुरु जी ने समाज मे ऐसी इंसानियत की मिसाल कायम की है व करोड़ो लॉगिन को परहित परमार्थ करने की प्रेरणा दी है।

निष्कर्ष:

हम सभी को Birds Nurturing करनी चाहिए। हमारा एक कदम बेजुबान, बेसहारा जानवरों की जान बचा सकता है। इन बेजुबान, बेसहारा पक्षियों के लिए दाना व पानी उपलब्ध करवाने से हम उनकी आत्मा से निकली दुआओं और ईश्वर की रहमतों को हासिल करने के काबिल बन सकते है।

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