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रूहानी बख्शिश का होना अध्यात्मिकतावाद का एक अनोखा व बडा़ ही दुर्लभ दृश्य है। कोई ईश्वरीय ताकत ही इस मुकाम को हासिल कर सकती है। बेशक वह आम लोगों के बीच रहकर उन्हीं की तरह अपना जीवन व्यतीत करती है, परंतु उस ताकत का भेद उचित समय आने पर ही खुलता है। इस रहस्य को खोलना उस से भी अधिक महत्वपूर्ण है। क्योंकि एक जलता हुआ दीप ही दूसरे दीपकों को प्रज्ज्वलित कर सकता है। इसी तरह कोई रूहानी ताकत ही किसी रूहानी ताकत को प्रकट कर सकती है। यह कार्य कोई आम इंसान नहीं कर सकता। कोई सच्चा व…


Valentine Day Special- Every day 'True Love Day'

हमारा भारत देश विभिन्न संस्कृति और सभ्यताओं का देश है। भारत की अपनी स्वयं की संस्कृति तो महान है, इसके साथ ही पश्चिमी सभ्यता को भी भारत अपने में संजोय हुए है। यही कारण है कि काफी समय से पश्चिमी सभ्यता में प्रेम का प्रतीक माना जाने वाला 'वेलेनटाइन डे' भारत में भी मनाया जाता है।

हम भारतीय जब भी मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा या चर्च आदि किसी भी धार्मिक स्थल के सामने से गुजरते हैं, तो हमारा शीश श्रद्धापूर्वक अपने आप ही झुक जाता है। कोई संत हो या फकीर हम उन्हें…


61st Maha Rehmokaram Month

सुप्रीम पावर! अर्थात् संसार की सबसे बडी़ ताकत जिसे हम अल्लाह, वाहेगुरु गॉड या रब्ब कहते है। वह इस धरती पर एक इन्सान रूप में अवतार धारण करती है। वो ताकत आम जन के तरह ही हम सभी के बीच में रहती है। जिसका भेद तब तक मालूम नहीं होता, जब तक उस जैसी ही महान ताकत उसे उजागर ना कर दे। उस ताकत को हम 'सतगुरु' कहकर पुकारते हैं। क्योंकि 'सतगुरु ही सतगुरु' को जाहिर कर सकता है। उस ताकत के जाहिर होने का एक निश्चित समय, दिन, तारीख व घड़ी आदि सब कुछ एक…


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संत-महापुरुषों का धरती पर आगमन बड़ा ही सुखकारी होता है। आदिकाल से परमेश्वर के भेजे रूहानी दूत के रूप में संत-महात्मा अवतार धारण कर सृष्टि का उद्धार करने के लिए आते रहे हैं। लेकिन इस घोर कलयुग में जब चहु और स्वार्थ व हर तरह की बुराइयों का बोलबाला है, रूहें विवश होकर तड़प रही हैं। तब सतगुरु मालिक को स्वयं धरती पर आना पड़ा है। क्योंकि काल का असर दुनियावी लोगों पर इतना हो चुका है कि हर किसी के बस में नहीं है कि वह उस से छुटकारा पा सके। अपनी रूहों की कुल मालिक को पहचान होती…


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आप सभी जानते है की हर रोज सूरज उगता है और ढल जाता है। इसी नियम में वर्ष के 365 दिन कब हमारे पास से होकर निकल जाते है, हमें पता भी नहीं चलता और ना कभी हमने किसी दिन सूरज के उगने का इंतजार किया और ना ही इस बात से हमें कोई वास्ता रखा। परंतु जैसे ही वर्ष के कुछ शेष दिन रह जाते हैं, तो हमें जनवरी के सूरज उगने की एक कसक सी लग जाती है। जमाने भर में उत्सव का माहौल हो जाता है। पूरा विश्व एक सरूर, एक जुनून में खोया-खोया लगता है। महफिल…


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आज के इस आधुनिक समय में जहां पर अत्यधिक लोग अपने जीवन को तमाम सुविधाओं के साथ जी रहे हैं। वहीं हमारे समाज का एक वर्ग ऐसा भी है, जिसमें लोग आदिवासियों के रूप में अपना जीवन व्यतीत करते हैं। उन लोगों को हमारे समाज में असभ्य माना जाता है और वे लोग समाज के तौर तरिकों से अंजान है। जिन्हें कपड़े पहनने, खाना बनाने व खाना खाने के बारे में अधिक जानकारी नहीं है।आजकल, हम में से बहुत से लोग उनके अस्तित्व के बारे में भी नहीं जानते हैं, और उनके भले व उत्थान के बारे में सोचना तो…


मनुष्य भगवान की बनाई हुई एक सर्वश्रेष्ठ कलाकृति है। मनुष्य शरीर का एक-एक अंग किसी न किसी खास वजह से बनाया गया है। जैसे सुनने के लिए कान, सूंघने के लिए नाक, खाने के लिए जिह्वा व देखने के लिए आंखे।

सोचिए यदि आपको बिना आंखों के जीना पड़े तो…..इस विचार से ही डर लगता है ना?

तो सोचिए उन लोगों का जीवन कैसा होता होगा जिनके पास बचपन से ही देखने की दृष्टि नहीं है या फिर जो किसके accident की वजह से अपनी आंखों की रोशनी खो चुके हैं।

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भारत में लगभग 6.2 करोड़ लोग आंखों की रोशनी…


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संतान — एक ऐसा शब्द जिस से हर पती-पत्नी का जीवन माता-पिता कहलाने के बाद सम्पूर्ण जीवन कहलाता है। आज के आधुनिक समय में भी जिस माता-पिता के जीवन में संतान का सुख नहीं होता, उन्हें समाज विभिन्न तरीकों से नीचा दिखाकर अपमानित करता है। इसका कहीं ना कहीं सबसे बड़ा दोषी हमारा पढा़- लिखा समाज होने के बावजूद भी महिलाओं को ही समझा जाता है। उन्हें विभिन्न तरह की बातें सुना-सुना कर कलंकित किया जाता है।

जिस माता-पिता के जीवन में संतान का सुख होता है, उन्हें एक खुशहाल परिवार कहा जाता है।

A child fills an entire home…


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जल और बिजली दोनों हमारे आवश्यक प्राकृतिक संसाधनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। दोनों का ही हमारे जीवन में विशेष महत्व हैं। जब भी उर्जा की कटौती व पानी की कमी होती है। तो हमारे सारे कामकाज एक अंधकार में बदल जाते हैं। यह दोनों ना केवल आरामदायक जीवन के लिए, बल्कि हमारे अस्तित्व के लिए भी महत्वपूर्ण बिंदु है। खाना पकाने, प्यास बुझाने के लिए पानी पीने, स्नान करने आदि जैसी नियमित गतिविधियों के लिए पानी और ऊर्जा दोनों की ही आवश्यकता होती है। इसलिए जल और बिजली दोनों संसाधनों का संरक्षण करना हमारे लिए आवश्यक हैं। यह दोनों…


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इंसानों से भरी इस दुनिया में आज हर कोई अपने मतलब से मतलब रखता है। हर इंसान खुद के अलावा किसी के बारे में सोचने के लिए समय नहीं है। यदि वह किसी से बात भी करे तो इसके पीछे उसका कोई न कोई मकसद है। तो ऐसे हालात में जब किसी का कोई अपना उस से बिछड़ जाए तो वो कैसे उम्मीद कर सकता है कि वह उन्हें दोबारा मिलेगा।

जी हां, हम यहां बात कर रहे है हर शहर, हर कस्बे में फुटपाथ व गलियों में आवारा घूमने वाले मानसिक रोगियों की। ऐसे लोग जिन्हें आमतौर पर समाज…

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